कभी खाने के थे लाले, अब कचरे से हर साल कमाते है तीन करोड़ रुपये; ऐसा रहा कश्मीर के युवा का सफर

Samwad Chhattisgarh
दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम के गडीहामा के तारिक अहमद गनई को बचपन से ही गंदगी से चिढ़ थी। जहां भी कचरा देखते तो उसे उठाकर कूड़ेदान में डालते। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने पर कम उम्र में दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करने को मजबूर थे। 
अधिक पैसे कमाने की चाह में दिल्ली में एक फैक्ट्री में काम करने लगे। कुछ वर्ष बाद अपने क्षेत्र में लौटे और प्लास्टिक व अन्य कचरे को दोबारा उपयोग लायक बनाने के लिए छोटा उद्यम आरंभ किया। आज कचरे के व्यापार से उनकी वार्षिक आय तीन करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। वह न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में सहयोग कर रहे हैं, बल्कि अन्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखा रहे हैं। 

ऐसा रहा 300 रुपये से तीन करोड़ रुपये तक का सफर

300 रुपये से तीन करोड़ कमाने तक की प्रेरक यात्रा को साझा करते हुए तारिक बताते हैं कि पिता किसान थे। थोड़ी जमीन पर खेती से मुश्किल से हमारा पेट पालते थे। हम चार भाई-बहन हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। घर के हालात देख दिहाड़ी मजदूरी करने लगे। वर्ष 2009 में दिल्ली गए और कबाड़ फैक्ट्री में नौकरी मिली। प्लास्टिक, पालीथिन, कागज, पुराने टिन आदि को बोरियों में रखना या वाहन से नजदीकी कचरा निस्तारण इकाइयों तक पहुंचाना होता था।

पांच वर्ष में अंदाजा हुआ कि जिस कचरे को इधर-उधर फेंककर लोग प्रदूषण फैलाते हैं, उसके निस्तारण से नई चीजें तैयार की जा सकती हैं। तब फैसला किया कि घर वापस जाकर कचरा प्रबंधन इकाई खोलेंगे। तारिक कहते हैं कि इसके लिए 20 लाख रुपये की आवश्यकता थी। वर्ष 2014 में दिल्ली से वापस आकर एमएसएमई योजना में मदद ली और बैंक से ऋण लेकर छोटा उद्यम आरंभ किया। तीन वर्षों में सफलता के इस मुकाम तक पहुंच चुके हैं। 

जिले को स्वच्छ रखने में भी दी मदद

लगभग चार लाख आबादी वाले कुलगाम जिले की सड़कों से आधे से अधिक कचरा तारिक की कचरा इकाई में लाया जाता है जहां से इसे प्रोसेसिंग के बाद नए उत्पादन बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर से बाहर भेजा जाता है। जिले की म्युनिसिपल काउंसिल के चेयरमैन मुनीब अहमद जरगर कहते हैं कि तारिक इस उद्यम से अच्छी कमाई कर रहे हैं, लेकिन उनकी इस कोशिश से जिले में कचरा प्रबंधन में भी काफी मदद मिल रही है।

100 लोगों को मिला रोजगार

तारिक की कचरा प्रबंधन इकाई में 100 लोगों को रोजगार मिला है। श्रमिकों को महीने में 10-15 हजार रुपये की आय हो जाती है। कुछ श्रमिक शहर से कचरा एकत्र करने का कार्य करते हैं तो कुछ के पास छंटाई के बाद कचरा कुलगाम से बाहर अन्य शहरों की कचरा प्रसंस्करण इकाइयों को भेजा जाता है। तारिक कहते हैं कि कचरा आसानी से मिल जाता है, बस उसे छंटाई करने के बाद प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचाना होता है।

Share This Article