संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ न्यूज कुसमी बलरामपुर/9111740798

बलरामपुर जिले के रामानुजगंज वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम चन्द्रनागर में वन विभाग द्वारा 100 लोगों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया गया था लेकिन 6 महीना बीत जाने के बाद मामला अब तक चुप है वन विभाग ने नोटिस के माध्यम से संबंधित लोगों को तीन दिनों के भीतर वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था चेतावनी दी गई है कि दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई वास्तव में होगी या फिर हमेशा की तरह “कागजी नोटिस” तक ही सिमट कर रह जाएगी आखिर कब तक चुप रहेगी विभाग?
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि चन्द्रनगर में वन भूमि पर कब्जा एक दिन या एक बार में नहीं हुआ है। वर्षों से धीरे-धीरे 100 से अधिक लोगों द्वारा कब्जा किया गया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि जब कब्जा लगातार हो रहा था, तब वन विभाग क्या कर रहा था? स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब कुछ वन विभाग की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं है। यदि समय रहते कार्रवाई की जाती, तो आज हालात इतने गंभीर नहीं होता इतना ही नहीं लाखो रुपये का तार फिनिसिंग होता है और लाखो रुपये का पौधा रोपण होता है लेकिन पौधा लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं उस जगह मका धान सरसो रोपण बन जाता है आखिर कैसा पौधा रोपण होता है यह सोचने वाली बात है.आखिर वन विभाग क्यों चुप्पी साधे है इतना ही नहीं ग्राम चन्द्रनागर के फोरेस्ट की भूमि स्टाम पेपर मे भी खरीदी बिक्री खुले आम हो रहा है लेकिन वन बिभाग जान कर अनजान बने है ज़ब इस बात को रेंजर निखिल सक्सेना से बात की गई तो उनके पास से क्या जबाब मिला सुन कर आप खुद चौक जाएंगे निखिल सक्सेना सिर्फ जबाब मे आया की हमलोग नोटिस सभी लोगो को दिया था लेकिन हाई कोर्ट से इस्टे लेलिया अब बारहल सोचने वाली यह बात है की जब वन भूमि की जमीन है तो इस्टे कौन दिया जिले के रेंजर एसडीओ तमाम अधिकारी जान कर आँख मुंदे हुए है. ग्राम चंद्रनगर मे दो जगह एक का नाम है अरख पारा दूसरा पूर्ब पारा यह दोनों जगह जम कर अतिक्रमण किया गया है लेकिन इसको पूछने वाला कोई नहीं है कब्ज़ा धारी बाहर ग्राहक को बुलाकर फोरेस्ट की भूमि जमकर स्टाम्प पेपर मे खरीदी बिक्री किये है वह भी फरेस्ट की अधिकारी को मिली भगत से ग्राम चंद्रनगर मे पौध रोपण तो होता है लेकिन एक भी पौध पेड़ नहीं बन सका वन बिभाग की रवैए के चलते लोग बोलने को हैं मजबूर आखिर इसका है जिम्मेदार कौन
