कुसमी,,मांदर की थाप पर झूम उठा देवरी, उरांव समाज के सामूहिक करमा महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब।

Samwad Chhattisgarh

✍🏻✍🏻संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर ✍🏻✍🏻

मांदर की थाप पर झूम उठा देवरी, उरांव समाज के सामूहिक करमा महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब

आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की दिखी अनूठी पहल, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरामणि निकुंज सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने की शिरकत, पारंपरिक वेशभूषा में महिला-पुरुषों और युवाओं ने करमा नृत्य से बांधा समां।

कुसमी। आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक एकता का प्रतीक करमा पर्व ग्राम पंचायत देवरी में पूरे उत्साह, उमंग और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को उरांव समाज की ओर से आयोजित सामूहिक करमा महोत्सव में क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। मांदर की गूंज, पारंपरिक गीतों की मधुर धुन और सामूहिक करमा नृत्य से पूरा गांव उत्सव के रंग में रंगा नजर आया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों, युवतियों और युवाओं ने एक साथ नृत्य प्रस्तुत कर आदिवासी संस्कृति की मनमोहक झलक पेश की।

ग्राम पंचायत देवरी की सरपंच शशि टोप्पो की अध्यक्षता में आयोजित इस महोत्सव में समाज के हजारों लोगों की सहभागिता देखने को मिली। सुबह से ही गांव में उत्सवी माहौल बना रहा। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, मांदर की थाप और करमा गीतों की गूंज के बीच लोगों का उत्साह भी बढ़ता गया। आयोजन ने न केवल पारंपरिक संस्कृति को जीवंत किया, बल्कि समाज की एकजुटता, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती से प्रदर्शित किया।

जिला पंचायत अध्यक्ष हीरामणि निकुंज सहित जनप्रतिनिधियों ने की सहभागिता

सामूहिक करमा महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष हीरामणि निकुंज शामिल हुईं। उनके साथ जनपद पंचायत अध्यक्ष बसंती भगत, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष अशोक सोनी, नगर पंचायत अध्यक्ष राजेंद्र भगत, देवसाय भगत, मंडल अध्यक्ष शशि टोप्पो, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष उमेश, इंद्र निकुंज सीजे प्रजापति घुटरा डीह सरपंच बिंदु सिंह रामनगर सरपंच संदीप निकुंज और गौरव कुजूर सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। सामूहिक आयोजन के माध्यम से सामाजिक सद्भाव, पारस्परिक सहयोग और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजकर रखने का संदेश सामने आया।

मांदर की थाप और करमा गीतों पर थिरके महिला-पुरुष

करमा महोत्सव का सबसे आकर्षक दृश्य पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों और युवाओं का सामूहिक नृत्य रहा। मांदर की थाप पर कदम से कदम मिलाकर नृत्य करते प्रतिभागियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। पारंपरिक गीतों और नृत्य की लय ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

करमा पर्व आदिवासी समाज की जीवनशैली, प्रकृति से जुड़ाव और सामूहिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस पर्व के माध्यम से समाज के लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान को अभिव्यक्त करते हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं। देवरी में आयोजित महोत्सव में भी इन सांस्कृतिक मूल्यों की स्पष्ट झलक देखने को मिली।

समाज के प्रमुखों और वरिष्ठजनों की रही महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम में उरांव समाज के प्रमुख रामचंद्र भगत, बसंत कुमार भगत, मंगल साय राम, सुमेश्वर टोप्पो, रामचंद्र निकुंज, बहादुर राम, घुटराडीह सरपंच बिंदु सिंह, सौरभ कुमार, उत्पल, जितेंद्र एक्का, संदीप निकुंज, तिलु राम और धीरजन राम सहित समाज के अनेक प्रमुख एवं वरिष्ठजन उपस्थित रहे।

वरिष्ठजनों और समाज के प्रमुखों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। ऐसे अवसर समाज के लोगों को एक मंच पर लाने, आपसी संबंधों को मजबूत करने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। सामूहिक करमा महोत्सव में लोगों की सक्रिय भागीदारी ने सामाजिक एकजुटता की भावना को भी प्रदर्शित किया।

नई पीढ़ी को संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का प्रयास

आधुनिक जीवनशैली के बढ़ते प्रभाव के बीच पारंपरिक पर्वों और सांस्कृतिक आयोजनों का महत्व और भी बढ़ जाता है। करमा जैसे पर्व समाज को अपनी जड़ों, लोकगीतों, पारंपरिक नृत्य और रीति-रिवाजों से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं। ग्राम देवरी में आयोजित इस सामूहिक महोत्सव में बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक की भागीदारी ने यह दर्शाया कि आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर सजग है।

सामूहिक रूप से पर्व मनाने की परंपरा सामाजिक समरसता को मजबूत करती है। ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के बीच मेल-मिलाप बढ़ाने के साथ-साथ सामुदायिक सहयोग और भाईचारे की भावना को भी प्रोत्साहित करते हैं। करमा पर्व के गीतों और नृत्य के माध्यम से समाज की पारंपरिक जीवनशैली तथा सांस्कृतिक पहचान की झलक देखने को मिली।

सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक बना महोत्सव

वही कोरोंधा थाना प्रभारी गजपति मीरे् अपने टीम के साथ चौकसी बढाकर रखे वह भी साथ में रहे मौजूद ताकि शांति पूर्ण तरीके से हो कार्यक्रम का आयोजन।

ग्राम पंचायत देवरी में आयोजित उरांव समाज का सामूहिक करमा महोत्सव उत्साह, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। मांदर की थाप पर एक साथ थिरकते महिला-पुरुषों और युवाओं ने अपनी सांस्कृतिक विरासत का शानदार प्रदर्शन किया। जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठजनों और ग्रामीणों की सहभागिता ने आयोजन को और अधिक भव्य बनाया।

महोत्सव ने यह संदेश दिया कि संस्कृति और परंपराएं किसी भी समाज की पहचान होती हैं। इन्हें सहेजना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है। देवरी में करमा पर्व के अवसर पर उमड़ा उत्साह और लोगों की व्यापक सहभागिता आदिवासी संस्कृति के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाती नजर आई। मांदर की गूंज, पारंपरिक गीतों और सामूहिक नृत्य के बीच संपन्न यह आयोजन क्षेत्र में सांस्कृतिक एकता और भाईचारे की यादगार मिसाल बना।

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