कोरिया,,भरतपुर सोनहत विधायक के दौरे मे भाजपा संगठन के कार्यकर्ता लगातार नदारद ?

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क्या बाहरी ठेकेदारो का विरोध करने वाले स्थानीय कार्यकताओ को विधायक ने किया किनारे.. या संगठन के कार्यकर्ताओ ने खुद बनाई विधायक से दुरी?



भरतपुर सोनहत विधायक के दौरे मे भाजपा संगठन के कार्यकर्ता लगातार नदारद ?

कुछ दिन पूर्व भाजपा मंडल महामंत्री सहित अन्य पदाधिकारियो ने बाहरी ठेकेदारो पर स्थानीय जनप्रतिनिधियो व विभागीय अधिकारियो को धमकाने का शोसल मीडिया मे लगाया था आरोप।

क्या संगठन के कर्मठ पदाधिकारीयो ने बाहरी ठेकेदारो का विरोध कर अपने पैर मे मार ली कुल्हाड़ी?

विपक्ष मे संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओ का विधायक के दौरे मे उपस्थित न होना सोनहत मे बना चर्चा का विषय…

कोरिया/सोनहत
राजनीति मे कब क्या हो जाए ये यह कोई नही जान सकता। राजनीति मे कब कौन खास व्यक्ति दुश्मन बन जाए और कब कौन दुश्मन खास बन जाए यह भी कोई नही जानता। राजनीतिक की बाते भविष्य की गर्भ मे छुपी होती है। ऐसे ही कुछ विषयों को लेकर सोनहत क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है. चर्चा इन बातो को लेकर गर्म है की वर्तमान मे सत्ता मे रहने को तो भाजपा है. और स्थानीय विधायक भी भाजपा से है लेकिन विपक्ष के दौर मे भाजपा के पक्ष मे झंडा और डांड लेकर खड़े रहने वाले संगठन के कर्मठ कार्यकर्ता जो संगठन के पदाधिकारी है वे नजर आना बंद हो गए है. ऐसे मे लोगो के बीच सवाल उठ रहा है की आखिर कांग्रेस सरकार से प्रताड़ित व पूर्व कांग्रेस विधायक के खिलाफ लगातार आवाज उठाने वाले भाजपाई क्यो भाजपा विधायक के दौरे के दौरान अगल-बगल नही दिखाई दे रहे है। क्या संगठन के पदाधिकारियो को विधायक ने अपने से किनारे लगा दिया है या संगठन के सिपाहियो ने अपने को खुद से विधायक से दुर कर दिया है। सवाल इसलिए उठ रहे है क्यो की विपक्ष मे रहते हुए इन भाजपा कार्यकताओ ने जनता से कई वादे किए है और आमजन से सीधा जुड़ाव है। अब आमजन इन्ही संघर्ष करने वाले कार्यकताओ को खोज रही है।

*क्या संगठन के कार्यकर्ताओ को बाहरी ठेकेदारो का विरोध करना पड़ा भारी*
कुछ दिन पूर्व भाजपा सोनहत मंडल महामंत्री तथा अन्य भाजपाईयो द्वारा बाहरी ठेकेदारो को लेकर शोसल मीडिया पर पोस्ट डाला गया था। जिसमे भाजपाईयो ने आरोप लगाते हुए कहा था कि बाहरी ठेकेदार स्थानीय जनप्रतिनिधियो व विभागीय अधिकारीयो को धमका रहे है। जिसके बाद दो ठेकेदारो का नाम भी सार्वजनिक रूप से पोस्ट किया गया था। बाद मे दोनो व्यक्तियो का फोटो स्थानीय विधायक के साथ देखा गया था। जिसके बाद स्पष्ट हुआ की दोनो ठेकेदार स्थानीय विधायक के करीबी है. अब इन बाहरी ठेकेदारो का विरोध करने वाले संगठन के पदाधिकारीयो को अचानक विरोध करने के बाद से लगातार विधायक से दूरी बनाते देखा जा रहा है. जिसके बाद लोगो मे चर्चा का विषय बना हुआ है व लोग दबी जुबान से यह कहते हुए सूने जा रहे है कि बाहरी ठेकेदारो का विरोध करने का नतीजा संगठन के भाजपाईयो को मिला है और विधायक ने उन्हे किनारे कर दिया है। लेकिन कुछ भाजपाईयो का यह भी मानना है कि विधायक की कार्यशैली से नाराज इन पदाधिकारीयो ने खुद विधायक से अपनी दुरी बना ली है। बहरहाल जो भी हो लेकिन विपक्ष मे संघर्ष करने वालो को किनारे होते देख लोगो मे नाराजगी व्याप्त है।

*विधायक के करीबियो का स्थानीय स्तर पर  हस्तक्षेप बढ़ा*
सोनहत मंडल मे चुनाव समय से लेकर अब तक सोनहत क्षेत्र मे बाहरी व विधायक के करीबी गृहक्षेत्र यानी की श्रीनगर के लोगो का दबदबा कायम करने का लगातार प्रयास रहा है. यह हम नही कह रहे ब्लकि स्थानीय कार्यकर्ताओ के बीच मे लगातार यह विषय दबी जुबान से चर्चा का विषय बना हुआ है. कार्यकर्ताओ का कहना है की जिन लोगो ने प्रेमनगर विधानसभा मे लगातार आमजन का शोषण कर विधायक की धवि धूमिल करने का काम किया. वे भरतपुर सोनहत मे विधायक के अगर-बगल खड़े होकर अपनी नेतागीरी चमका रहे है. तथा सोनहत मे विधायक का नाम लेकर उगाही कर रहे है। ऐसे लोग सोनहत के कर्मठ कार्यकर्ताओ को नीचा दिखाने का प्रयास लगातार कर रहे है। तथा स्थानीय विषय पर अपनी मनमानी करते देखे जा रहे है।
कार्यकर्ताओ के दबी जुबान से यह सुनने को मिल रहा है की श्रीनगर के यही बाहरी लोग सोनहत मे अपने  रिस्तेदारो को भी विधायक से लाभ दिलवा रहे है और भाजपा कार्यकर्ताओ का हक मार रहे है। जबकी यह लोग चुनाव मे वर्तमान भाजपा विधायक कि खुलेआम विरोध कर भाजपा कार्यकर्ताओ को परेशान किए थे। और अब विधायक के अगल-बगल दिखने वाले रिस्तेदारो के संरक्षण मे लाभ कमा रहे है व चुनाव जीतने मे योगदान देने वाले भाजपाई सत्ता से जुझ रहे है।
यही भी एक कारण हो सकता है कि विधायक से संगठन के कार्यकर्ताओ ने अपनी दुरी बना ली हो।

*पूर्व कांग्रेस विधायक के खास पंचायत सचिव को भाजपा विधायक के करीब आने पर भी नाराज़गी*
सोनहत मे कुछ दिन पूर्व पंचायत प्रतिनिधियो का सम्मान समारोह विधायक द्वारा आयोजित करवाया गया था। इस कार्यक्रम के विषय मे स्थानीय पार्टी के नेताओ को किनारे कर एक पूर्व कांग्रेस विधायक के करीबी पंचायत सचिव के बताए गए रूप रेखा के अनुसार आयोजित किया गया था। जिसकी पुरी जिम्मेदारी सचिव को दिया गया था। यह बात जब भाजपा संगठन के लोगो को पता चला तो उन्होने नाराज़गी जाहिर करते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया।  संगठन के लोगो को नाराज देख भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य व जनपद अध्यक्ष सहित जनपद सदस्यो व संरपचो ने भी कार्यक्रम से दुरी बना ली। इस विषय पर भाजपाईयो ने सवाल उठाते हुए कहा की भष्टाचार मे लिप्त जो सचिव पांच साल तक कांग्रेस विधायक का गुणगान किया. भाजपा कार्यकर्ताओ को परेशान किया व चुनाव मे कांग्रेस के पक्ष मे खुलेआम काम किया। भाजपा का विरोध किया अब भाजपा विधायक के निवास मे चरण वदन कर मलाई खाने की फिराक मे है.जो कतई बर्दाश्त से बाहर है। विधायक के दौरो मे अब तक संगठन व भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियो की अनुपस्थित यह साबित करती है कि यह भी एक कारण हो सकता है कि भाजपा पदाधिकारी इसलिए भी विधायक से दुरी बताए हुए है।


*शोसल मीडिया पोस्ट मे जनपद अध्यक्ष का नाम नही*
सोनहत विधायक के दौरे मे वैसे तो संगठन के पदाधिकारी नदारद रहते है लेकिन कुछ उपस्थित रहते भी है तो सायद उन्हे विधायक द्वारा नजरअंदाज किया जाता है यह विधायक के सोशल साइट्स पर देखने को भी मिल रहा है। जहा विधायक के बगल मे चेरवा समाज की नेत्री व जनपद पंचायत सोनहत की अध्यक्ष बैठी हुई दिखाई दे रही है लेकिन विधायक के फेसबुक पेज पर उसका नाम नही लिखा गया है। जबकि जनपद अध्यक्ष भाजपा समर्थित है। जनपद अध्यक्ष का विधायक के फेसबुक पर फोटो दिखना व नाम न आना यह आश्चर्य की बात है. और लोगो मे चर्चा का विषय है।


*विधायक के निज सहायक ने फेसबुक मे किसे कहा कालनेमि..?*

भाजपा सोनहत के संगठन के कार्यकर्ताओ द्वारा शोसल मीडिया मे बाहरी ठेकेदारो का विरोध वाला पोस्ट डालने के तुरंत बाद स्थानीय विधायक के निज सहायक ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि “कालनेमियो ने कभी हनुमान जी का रास्ता नही रोक पाया है” विधायक के निज सहायक के इस फेसबुक पोस्ट को लोग भाजपा कार्यकर्ताओ से जोड़कर देख है. और विधायक के निज सहायक के इस पोस्ट से संगठन के कार्यकर्ताओ के बीच मे व  सोनहत के स्थानीय लोगो मे सवाल कई उठ रहे है. आखिर कौन कालनेमि है और कौन हनुमान है. क्या बाहरी ठेकेदारो का विरोध करना व सोनहत मे इनका रास्ता रोकने वाले भाजपा संगठन के कार्यकर्ताओ को ही तो कालनेमि की संज्ञा नही दी जा रही है.और बाहरी लोगो को हनुमान जी से तुलना की जा रही है?  ऐसे मे लोगो का मानना है की जो संगठन के संघर्षशील कार्यकर्ता विपक्ष मे व चुनाव मे भाजपा के लिए हनुमान जी की तरह खड़े रहे. वे आज कालनेमि की उपाधि से नवाजे जा रहे. ऐसे मे भाजपा कार्यकर्ताओ के लिए इससे शर्मनाक और क्या होगा जोक उन्हे विधायक के निज सहायक नीचा दिखाने का ऐसा काम कर रहे है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या स्थानीय विधायक के जानकारी मे यह फेसबुक पोस्ट हुआ था या विधायक अभी तक पोस्ट से अनभिज्ञ है. क्यो कि विधायक के अगल-बगल चापलूस की तरह घुमने वाले कुछ लोगो ने जो बाहरी ठेकेदारो का चापलूसी करते सार्वजनिक रूप से उक्त पोस्ट मे कंमेट किया है की सोनहत मे भी कुछ कालनेमि है. उक्त फेसबुक पोस्ट चाहे किसी के संबंध मे हो परंतु इस पोस्ट से सोनहत क्षेत्र मे राजनीतिक गलियारो मे चर्चा का बाजार गर्म है। और संगठन के पदाधिकारियो को विधायक के कार्यक्रम से दूर होने का यह भी बड़ा कारण हो सकता है यह भी लोगो का कहना है।

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