बलरामपुर जिले में सिक्का बंदी’ से जनता बेहाल  क्या कलेक्टर का आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित

Samwad Chhattisgarh

संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ न्यूज कुसमी बलरामपुर/9111740798

बलरामपुर में सिक्का बंदी’ से जनता बेहाल कलेक्टर का आदेश का किया जा रहा उल्लंघन।

बलरामपुर जिला में कहने को तो हम 21वीं सदी के डिजिटल भारत में जी रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के अंतरराज्य  जिले बलरामपुर में आज भी भारतीय मुद्रा का अपमान सरेआम हो रहा है।

जिले में एक और दो रुपये के सिक्के अघोषित प्रतिबंध’ का शिकार हैं। आलम यह है कि राजधानी रायपुर समेत अन्य शहरों में जो सिक्के धड़ल्ले से चल रहे हैं उन्हें बलरामपुर के दुकानदार छूने तक को तैयार नहीं हैं आखिर क्यों?

हाल ही में जिले के कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने जनसंपर्क विभाग (PRO) के माध्यम से कड़े निर्देश जारी किए थे कि कोई भी दुकानदार भारतीय मुद्रा लेने से इनकार नहीं कर सकता है ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है।

लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके उलट है। कलेक्टर के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए दुकानदार बेखौफ होकर सिक्के लेने से मना कर रहे हैं ऐसा लगता है जैसे प्रशासन का डर दुकानदारों के बीच खत्म हो चुका है।
ग्रामीण जनता जब अपनी नोट पैसा कमाई लेकर बाजार पहुंचती है तो उन्हें अजीबोगरीब स्थिति का सामना करना पड़ता है।

सामान लेने पर दुकानदार खुले पैसे न होने का बहाना बनाकर राउंड फिगर में ज्यादा पैसे काट लेते हैं।
एक-दो रुपये वापस करने के बजाय ग्राहकों के हाथ में जबरन माचिस का डबा या चॉकलेट थमा दी जाती है।

क्या अब चॉकलेट ही भारत की नई मुद्रा बन गई है बस और रिक्शा चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं। चिल्हर न होने का बहाना बनाकर 12 रुपये के बजाय 15 या 20 रुपये तक ऐंठ लिए जाते हैं। ग्रामीणों और छोटे व्यापारियों का तर्क है कि जब तक स्थानीय बैंक सक्रिय रूप से इन सिक्कों का लेन-देन शुरू नहीं करते और जनता में विश्वास पैदा नहीं करते तब तक यह समस्या बनी रहेगी। ग्रामीण जनता को डर है कि अगर बैंक सिक्के नहीं लेगा तो हम लोग इन सिक्कों का क्या करेंगे  यह डर ही दुकानदारों की मनमानी को खाद-पानी फ़ायदा दे रहा है।
बलरामपुर एक अंतर्राज्यीय सीमा वाला जिला है। बाहरी राज्यों और शहरों से आने वाले लोग जब यहाँ सिक्के नहीं चलने की बात सुनते हैं, तो वे जिले की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पकड़ पर सवाल उठाते हैं। जब राजधानी रायपुर दुर्ग भिलाई सारे जगह में यह सिक्के चल सकते हैं, तो बलरामपुर में क्यों नहीं क्या प्रशासन केवल आदेश जारी करके अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेगा  या फिर उन दुकानदारों और संस्थाओं पर दंडात्मक कार्रवाई होगी जो भारतीय मुद्रा को स्वीकार करने से इनकार कर देश के कानून को चुनौती दे रहे हैं खास कर सब्जी दुकानों में मनमानी ढंग से पैसे ले लेते हैं या तो फिर 1 किलो सामान की एवज में कहते हैं कि सीधा ₹20 का कर दे रहा हूं छुट्टा नहीं होने के कारण तो क्या इन लोगों को ऊपर होगी कार्रवाई अब देखने वाली बात है की बलरामपुर जिला में क्या इस खबर प्रकाशन होने के बाद प्रशासन जागेगी या मनमानी ढंग से दुकानदारों की मनमानी चलते रहेगी अब सबके निगाहें प्रशासन की ओर टिकी हुई है ।

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