
आंगनबाड़ी केंद्र बना नन्हें कदमों की पहली पाठशाला स्वागत चार्ट से बढ़ रहा आत्मविश्वास, गीत-खेलों से सीख रहे बच्चे
पौष्टिक आहार से मिल रहा बेहतर पोषण

संवर रहा बच्चों का भविष्य

✍🏻 संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर
बलरामपुर, 05 अगस्त 2026/बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव उनके शुरुआती वर्षों में ही रखी जाती है। इसी सोच को साकार करते हुए राज्य शासन की मंशा के अनुरूप महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित समेकित बाल विकास सेवा के अंतर्गत जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा और बेहतर पोषण के लिए नवाचार आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन्हीं प्रयासों का उदाहरण स्कूल पारा भानौरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र है, जो नन्हे बच्चों के लिए सीखने, खेलने और संस्कारों की पहली पाठशाला बनकर उभरा है।

इस केंद्र की सबसे विशेष पहल स्वागत चार्ट है। केंद्र में प्रवेश करने वाला प्रत्येक बच्चा अपनी पसंद के अनुसार चार्ट पर बने चित्रों में से किसी एक का चयन करता है। इसमें गले मिलना, मुट्ठी मिलाना, ताली देना, कोहनी मिलाना, हाथ मिलाना और नमस्ते जैसे स्वागत के विकल्प शामिल हैं। बच्चा जिस तरीके का चयन करता है, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उसी प्रकार उसका आत्मीय स्वागत करती हैं। इस अनूठी पहल से बच्चों का संकोच दूर होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और वे मुस्कुराते हुए शिक्षण गतिविधियों में शामिल होते हैं। साथ ही उनमें सामाजिक व्यवहार, संवाद कौशल और सकारात्मक भावनाओं का भी विकास हो रहा है।
केंद्र में प्रतिदिन प्रार्थना, स्वागत गीत, समूह गतिविधियां, शैक्षणिक खेल और रचनात्मक अभ्यास आयोजित किए जाते हैं।

बच्चों को गीत, कविता, लय, खेल और मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से अक्षर ज्ञान, अंक ज्ञान, रंगों की पहचान, चित्रों के माध्यम से वस्तुओं की पहचान तथा व्यवहारिक शिक्षा रोचक ढंग से सिखाई जाती है। इससे बच्चे सहजता से नई बातें सीख रहे हैं और उनका मानसिक, भाषाई, सामाजिक तथा बौद्धिक विकास तेजी से हो रहा है। साथ ही उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और मिल-जुलकर कार्य करने की भावना भी विकसित हो रही है, जिससे वे विद्यालय में प्रवेश के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो रहे हैं।
राज्य शासन द्वारा बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्र में निर्धारित मेन्यू के अनुसार पौष्टिक नाश्ता एवं गर्म पका हुआ मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे बच्चों को आवश्यक पोषण मिल रहा है। नियमित रूप से बच्चों की उपस्थिति, स्वास्थ्य एवं विकास की निगरानी की जाती है। साथ ही गर्भवती एवं धात्री माताओं को भी संतुलित आहार, स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिशु देखभाल संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी देकर जागरूक किया जाता है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका बच्चों के लिए परिवार जैसा स्नेहपूर्ण, सुरक्षित और बाल-अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। जिससे बच्चे बिना किसी झिझक के सीखने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। स्कूल पारा भानौरा का यह आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण आहार वितरण का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने वाली पहली पाठशाला बन चुका है।
जहां स्वागत से शुरू होती है शिक्षा, बच्चों का दूसरा घर बना आंगनबाड़ी केंद्र
आंगनबाड़ी में पढ़ रही सौम्या की माता सोनम सोनी कहती हैं कि स्कूल पारा भनौरा का आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के लिए पाठशाला ही नहीं, बल्कि दूसरा घर बन गया है। स्वागत चार्ट, खेल-आधारित शिक्षण और स्नेहपूर्ण वातावरण ने बच्चों में सीखने के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाया है। अब बच्चे स्वयं खुशी-खुशी आंगनबाड़ी जाने के लिए तैयार होते हैं और घर लौटकर गीत, कविताएं तथा दिनभर सीखी नई बातें उत्साहपूर्वक साझा करते हैं। सोनम सोनी कहती है कि आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव तैयार हो रहा है।
