संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ न्यूज़ कुसमी बलरामपुर

रायपुर,,पत्रकार से मारपीट और झूठी FIR पर बवाल
संवाद कार्यालय के अधिकारी पर गंभीर आरोप, प्रधानमंत्री को भेजी गई शिकायत

रायपुर/कोरिया:-
छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क संचालनालय के अपर संचालक **श्री संजीव तिवारी** पर एक पत्रकार से मारपीट, झूठी एफ.आई.आर. दर्ज करवाने और रात में पुलिस के माध्यम से पत्रकार के घर पर बर्बरता करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

इस पूरे मामले को लेकर स्वरांजली न्यूज़ के प्रधान संपादक एवं मीडिया सम्मान परिवार के सक्रिय सदस्य प्रिंसु पाण्डेय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जाँच और दंडात्मक कार्रवाई की माँग की है।
शिकायत की प्रति गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई है।
पूरा मामला—
घटना 07 अक्टूबर 2025 की है, जब दैनिक समाचार पत्र “बुलंद छत्तीसगढ़” (RNI No.CHHHIN/2008/26943) में “जनसंपर्क विभाग का अमर सपूत” शीर्षक से समाचार प्रकाशित हुआ था।
इस खबर में संवाद कार्यालय रायपुर के अपर संचालक संजीव तिवारी के दो दशकों से अधिक समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने और विभागीय प्रभाव के उपयोग का उल्लेख किया गया था।
अगले दिन, 08 अक्टूबर संवाददाता अभय शाह जब संवाद कार्यालय पहुँचे, तो श्री तिवारी ने कथित रूप से बदसलूकी और अपमानजनक व्यवहार किया।
09 अक्टूबर को जब अभय शाह अपने सहयोगियों के साथ संवाद कार्यालय पहुँचे, तो वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि श्री तिवारी ने पहले कॉलर पकड़कर धक्का दिया और फिर गला दबाने की कोशिश की। यह वीडियो फॉरेंसिक रूप से प्रमाणिक (forensically intact) बताया गया है।
पत्रकारों का आरोप: पद का दुरुपयोग और शक्ति का गलत प्रयोग
घटना के बाद श्री तिवारी ने अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए पुलिस में चार अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध झूठी एफ.आई.आर. (अपराध क्रमांक 0165/2025) दर्ज करवाई।
एफ.आई.आर. में सार्वजनिक संपत्ति नुक़सान निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 3(2) और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराएँ **132, 221, 296, 3(5), 324(4), 351(2)** लगाई गईं।
पत्रकारों का कहना है कि ये सभी सात वर्ष से कम सज़ा योग्य अपराध हैं, इसलिए गिरफ्तारी अपवाद है — जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय Arnesh Kumar vs State of Bihar (2014) और D.K. Basu vs State of West Bengal (1997) में कहा गया है।
रात में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
शिकायत के अनुसार, घटना के बाद 09 अक्टूबर की रात 1:37 बजे पुलिस ने पत्रकार मनोज पांडे के घर का गेट तोड़कर प्रवेश किया, महिला पुलिसकर्मी की अनुपस्थिति में तलाशी ली और कैमरा व डीवीआर ज़ब्त किए। इसे संविधान के अनुच्छेद 21 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन बताया गया है।
मीडिया सम्मान परिवार की माँगें
मीडिया सम्मान परिवार ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र के माध्यम से पाँच प्रमुख माँगें रखीं —
1️⃣ **संजीव तिवारी** पर धारा **352, 166, 166A, 307** के तहत आपराधिक केस दर्ज किया जाए।
2️⃣ उन्हें तत्काल **निलंबित** कर **विभागीय जाँच** प्रारंभ की जाए।
3️⃣ **पत्रकार मनोज पांडे** के घर पर बर्बरता करने वाले पुलिसकर्मियों पर
**धारा 324, 452, 354** के तहत केस दर्ज किया जाए।
4️⃣ इसे **सुप्रीम कोर्ट निर्देशों की अवमानना (Contempt of Court)** माना जाए।
5️⃣ जनसंपर्क विभाग की **विज्ञापन वितरण नीति** की स्वतंत्र जाँच समिति गठित की जाए।
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*प्रिंसु पाण्डेय (प्रधान संपादक, स्वरांजली न्यूज़ / सदस्य, मीडिया सम्मान परिवार) का बयान*
> “यह मामला सिर्फ एक पत्रकार पर हमले का नहीं है,
> बल्कि लोकतांत्रिक चरित्र और चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता की परीक्षा है।
> अगर शासन पारदर्शी कार्रवाई नहीं करता, तो यह संदेश जाएगा कि
> ‘शक्ति कानून से ऊपर है।’”
*विवेकानंद पाण्डेय (मैनेजिंग डायरेक्टर, स्वरांजली न्यूज़ चैनल) की टिप्पणी*
> “पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र के मूल ढांचे पर हमला है।
> एक अधिकारी द्वारा इस तरह का कृत्य प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ है।
> शासन को चाहिए कि निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों को दंडित करे।
> हम सब अभिव्यक्ति की आज़ादी और पत्रकार सुरक्षा के पक्ष में एकजुट हैं।”
— मीडिया सम्मान परिवार का बयान
> “पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इस पर हमला किसी भी सभ्य समाज में अस्वीकार्य है।
> अगर अधिकारी और पुलिसकर्मी इस तरह की बर्बरता करेंगे तो आम नागरिक की आवाज़ कौन सुनेगा?
> हम मांग करते हैं कि दोषियों पर तत्काल कार्रवाई कर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”
> — *मीडिया सम्मान परिवार (छत्तीसगढ़ इकाई)*
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मीडिया जगत में भारी आक्रोश
इस पूरे प्रकरण ने पत्रकार संगठनों और मीडिया जगत में गहरा आक्रोश पैदा किया है।
कई मीडिया संस्थानों और प्रेस संगठनों ने इसे **“प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला”** बताते हुए
**न्यायिक जाँच और दोषियों की गिरफ्तारी** की माँग की है।पत्रकार से मारपीट और झूठी FIR पर बवाल पत्रकारों ने जांच कर कड़ी कार्यवाही की किया मांग।
