संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ न्यूज़ कुसमी बलरामपुर/9111740798

बलरामपुर कुसमी प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार में ग्रामीणों ने ठेकेदार पर लगाया गंभीर आरोप..

टायरिंग किया हुआ सड़क में झाड़ू मारकर दिखाती ग्रामीण महिला।

आदिवासी विकासखंड कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत धनेशपुर के आश्रित ग्राम छुरा कोना, जो कि पहाड़ी कोरवा जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है, तक प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (प्रधानमंत्री जन-मन योजना) के अंतर्गत सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस कार्य की कुल स्वीकृत लागत 1 करोड़ 91 लाख 25 हजार रुपये बताई जा रही है, जिसमें लगभग 3 किलोमीटर लंबी डामर युक्त सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। निर्माण कार्य मैसर्स एल.सी. कटरे, मिशन रोड राताखार, जिला कोरबा द्वारा कराया जा रहा है।
लेकिन सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सामने आए वीडियो फुटेज के अनुसार निर्माण कार्य अत्यंत घटिया स्तर का किया जा रहा है। हालात यह हैं कि नवनिर्मित डामर सड़क पर झाड़ू लगाने मात्र से ही डामर और गिट्टी एक स्थान पर इकट्ठा हो जा रही है, जिससे साफ जाहिर होता है कि मानक अनुरूप सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया किस्म की बालू तथा 60 एमएम गिट्टी का उपयोग कर सड़क के किनारे तटबंध तैयार किया जा रहा है, जो भविष्य में बरसात के मौसम में सड़क के क्षतिग्रस्त होने का बड़ा कारण बन सकता है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यह सड़क ग्रामीणों, विशेषकर पहाड़ी कोरवा जनजाति के लोगों के लिए जीवन रेखा साबित हो सकती थी, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही ने योजना के उद्देश्य पर ही सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
इस पूरे मामले में जब संबंधित ठेकेदार से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिससे संदेह और गहरा गया है।
वहीं इस संबंध में रामकुमार तिर्की, उप अभियंता, प्रधानमंत्री जन-मन योजना ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि
“ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य ठीक ही कराया जा रहा है। ग्रेडर वगैरह चलने से कहीं-कहीं सड़क उबड़-खाबड़ हुई होगी।”
कलेक्टर बलरामपुर राजेंद्र कटारा – मुझे सड़क की जानकारी दे दीजिए मैं इसे दिखवा लेता हूँ .
हालांकि, उप अभियंता के इस बयान से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य सही होता, तो सड़क की परत इतनी कमजोर नहीं होती कि झाड़ू लगते ही डामर उखड़ने लगे।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन एवं उच्च स्तरीय जांच एजेंसियों से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आदिवासी अंचल के विकास के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।
