✍🏻संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर

नवाडीह कला पंचायत में ‘फंड मैनेज’ का खेल? बिना स्वीकृति कराए कार्य का भुगतान दूसरे मद से करने का आरोप, जांच के बाद भी उठ रहे सवाल।

ट्रैक्टर मालिकों की शिकायत पर हुई जांच, भुगतान दो किश्तों में हुआ; अब ग्रामीणों का आरोप—बिना प्रशासनिक स्वीकृति वाले कार्य का पैसा दूसरे मद से समायोजित किया गया।
बलरामपुर-रामानुजगंज | कुसमी | विशेष संवाददाता
ग्राम पंचायत नवाडीह कला में विकास कार्यों और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामला वर्ष 2025 में कराए गए सड़क मुरमीकरण एवं तालाब समतलीकरण कार्यों से जुड़ा है। ट्रैक्टर मालिकों का आरोप था कि कई महीनों तक कार्य कराने के बाद भी उन्हें भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद उन्होंने कलेक्टर जनदर्शन में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर विभागीय अधिकारियों की जांच टीम पंचायत पहुंची। जांच के बाद सरपंच द्वारा ट्रैक्टर मालिकों को दो किश्तों में भुगतान किया गया। हालांकि, अब कुछ ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जिस कार्य के लिए उस समय प्रशासनिक स्वीकृति नहीं थी, उसका भुगतान बाद में किसी दूसरे स्वीकृत मद की राशि से समायोजित किया गया।
क्या है आरोप?
ग्रामीणों का कहना है कि सितंबर 2025 में सड़क मुरमीकरण और तालाब समतलीकरण का कार्य कराया गया था, जबकि उस समय संबंधित कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति नहीं थी। भुगतान लंबित रहने पर ट्रैक्टर मालिकों ने शिकायत की।
जांच के बाद भुगतान तो हुआ, लेकिन आरोप है कि इसके लिए जून 2026 में स्वीकृत अन्य मुरमीकरण कार्यों की राशि का उपयोग किया गया।
ग्रामीणों का दावा
ग्रामीणों के अनुसार जांच के दौरान अधिकारियों के समक्ष पंचायत के अभिलेखों में चार मुरमीकरण कार्यों की सूची प्रस्तुत की गई, जिनकी कुल राशि लगभग ₹4.70 लाख बताई गई। आरोप है कि इन कार्यों में केवल औपचारिक या सीमित काम हुआ और इन्हीं मदों की राशि से पुराने लंबित भुगतान का समायोजन किया गया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वार्ड पंचों ने भी उठाए सवाल
कुछ वार्ड पंचों का कहना है कि पंचायत में स्वीकृत कार्यों के प्राक्कलन (एस्टीमेट) की जानकारी उन्हें नहीं दी जाती और न ही मूल्यांकन के समय उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने पंचायत कार्यों में अधिक पारदर्शिता की मांग की है।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ताओं और ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सरपंच का पक्ष।
इस संबंध में सरपंच एवं पंचायत सचिव का पक्ष फोन के माध्यम से करनी चाही लेकिनेंके द्वारा फोन रिसीव नई किया जिसके कारण प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
(नोट: यह समाचार शिकायतकर्ताओं एवं ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों तथा उपलब्ध शिकायत दस्तावेजों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच एवं प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही मानी जाएगी।)
