
कुसमी,जमीरा पाठ सीएमडीसी बॉक्साइट खदान में भारी लापरवाही का आरोप, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

मौके पर कई मजदूर बिना हेलमेट-मास्क के करते मिले काम, फर्स्ट एड, पेयजल और विश्राम शेड की व्यवस्था नहीं होने का दावा; डेंजर जोन व चेतावनी बोर्ड भी नदारद

✍🏻✍🏻 संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर ✍🏻✍🏻
कुसमी। बलरामपुर जिले के अनुविभाग कुसमी अंतर्गत सामरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत जमीरा पाठ के डूमरपाट स्थित सीएमडीसी की बॉक्साइट खदान में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खदान में भारी मशीनरी और बॉक्साइट पत्थरों के बीच मजदूरों से काम कराए जाने के दौरान कथित तौर पर कई बुनियादी सुरक्षा इंतजाम मौके पर नजर नहीं आए। निरीक्षण के दौरान कई मजदूर बिना हेलमेट और मास्क के काम करते दिखाई दिए। वहीं, फर्स्ट एड, पेयजल और धूप-बारिश से बचने के लिए विश्राम शेड जैसी सुविधाओं की कमी का भी दावा किया गया है।

मंगलवार को जब मीडियाकर्मी जमीरा पाठ के डूमरपाट स्थित बॉक्साइट खदान पहुंचे, तो कार्यस्थल पर अचानक हलचल बढ़ गई। मौके पर मौजूद कई मजदूर इससे पहले बिना हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के काम करते दिखाई दे रहे थे। मीडियाकर्मियों की मौजूदगी के बाद कर्मचारियों द्वारा मजदूरों को हेलमेट पहनने के लिए कहा गया। कुछ मजदूरों ने आनन-फानन में हेलमेट की व्यवस्था कर उसे पहन लिया।

इस पूरे घटनाक्रम ने खदान में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि कार्यस्थल पर सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं तो मजदूरों को नियमित रूप से उनका उपयोग क्यों नहीं कराया जा रहा था?
धूल और पत्थरों के बीच बिना सुरक्षा उपकरण काम करते दिखे मजदूर
बॉक्साइट खनन एवं पत्थर तोड़ने के कार्य में मजदूर सीधे धूल और पत्थरों के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में हेलमेट, मास्क, ग्लव्स और अन्य आवश्यक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल श्रमिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन मौके पर कई मजदूर बिना हेलमेट और मास्क के काम करते नजर आए।
तेज धूप के बीच मजदूरों द्वारा खुले स्थान पर काम किए जाने की स्थिति भी सामने आई। इससे श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

फर्स्ट एड और पेयजल व्यवस्था को लेकर भी सवाल
कार्यस्थल पर किसी मजदूर के चोटिल होने या अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में तत्काल प्राथमिक उपचार की व्यवस्था होना जरूरी है। लेकिन मौके पर फर्स्ट एड की समुचित व्यवस्था दिखाई नहीं देने का दावा किया गया।
इसके अलावा मजदूरों के लिए स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात भी सामने आई है। खनन क्षेत्र में गर्मी, धूल और भारी शारीरिक श्रम के बीच काम करने वाले मजदूरों के लिए पेयजल की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है।
धूप और बारिश से बचने के लिए विश्राम शेड का भी अभाव

खदान क्षेत्र में मजदूरों के बैठने और विश्राम करने के लिए कोई उचित शेड नहीं होने की बात सामने आई है। मजदूरों को खुले स्थान में ही बैठकर आराम करना पड़ता है। तेज धूप अथवा बारिश के दौरान यह स्थिति श्रमिकों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
ब्लास्टिंग क्षेत्र में सुरक्षा संकेतकों को लेकर गंभीर सवाल
खदान में ब्लास्टिंग से जुड़े सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मौके पर डेंजर जोन, चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा रिबन अथवा अन्य स्पष्ट संकेतक नजर नहीं आने का दावा किया गया। ऐसे में आसपास से गुजरने वाले लोगों, राहगीरों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है।
ब्लास्टिंग जैसी संवेदनशील गतिविधि के दौरान क्षेत्र को सुरक्षित तरीके से चिन्हित करना और लोगों को संभावित खतरे के प्रति सतर्क करना बेहद जरूरी है। यदि सुरक्षा संकेतक और चेतावनी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, तो यह गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है।
स्थानीय रोजगार को लेकर भी पहले से विवाद
जमीरा पाठ के डूमरपाट में संचालित इस बॉक्साइट खदान का उत्खनन कार्य छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (सीएमडीसी) की परियोजना के तहत फरीदाबाद की ठेका कंपनी मेसर्स तेजस कार्गो प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ परियोजना में स्थानीय लोगों को रोजगार देने का मुद्दा भी पहले से चर्चा में है। ग्रामीणों और स्थानीय योग्य युवाओं का आरोप है कि जनसुनवाई के दौरान स्थानीय लोगों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार रोजगार देने का भरोसा दिलाया गया था। इसके बावजूद बाहरी लोगों को प्राथमिकता दिए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
इसी मामले को लेकर पूर्व में ग्रामीणों द्वारा एसडीएम कुसमी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष भर्ती और स्थानीय योग्य युवाओं को रोजगार देने की मांग भी की जा चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सीएमडीसी अधिकारी ने कहा—पीपीई किट नहीं पहन रहे तो आदेश जारी करूंगा
मामले को लेकर छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के उप महाप्रबंधक (खान) उपेंद्र पाण्डेय से बात की गई। उन्होंने कहा कि यदि मजदूर पीपीई किट का उपयोग नहीं कर रहे हैं तो इस संबंध में आदेश जारी किया जाएगा।
वहीं स्थानीय रोजगार को लेकर उन्होंने कहा कि मजदूर हो या सुपरवाइजर, भू-स्वामी को प्राथमिकता मिलेगी। उन्होंने रोजगार से जुड़े मामले में जानकारी लेने की बात भी कही।
अब देखना यह होगा कि सीएमडीसी प्रबंधन और संबंधित ठेका कंपनी द्वारा श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीरता दिखाई जाती है और मौके पर सामने आई कमियों को दूर करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।
