✍🏻✍🏻 संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर ✍🏻✍🏻

कुसमी के आश्रम-छात्रावासों में प्रभार व्यवस्था पर बड़ा सवाल

एक शिक्षक के जिम्मे दो-दो संस्थाएं! दूसरे विकासखंड से शिक्षक लाकर भी प्रभार देने का दावा
13 सितंबर 2023 के विभागीय निर्देश के बाद भी व्यवस्था पर उठे सवाल, बच्चों की सुरक्षा और छात्रावास संचालन की निगरानी को लेकर चिंता
कुसमी। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित कुसमी विकासखंड के आश्रम-छात्रावासों में अधीक्षक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि कुछ आश्रम-छात्रावासों में एक ही शिक्षक अथवा शिक्षिका को दो-दो संस्थाओं का प्रभार सौंप दिया गया है। इससे छात्रावासों के नियमित संचालन, विद्यार्थियों की सुरक्षा, भोजन व्यवस्था, अनुशासन और दैनिक निगरानी की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि विभाग द्वारा 13 सितंबर 2023 को जारी पत्र क्रमांक एफ 9-7/2010/25-1 में आश्रम एवं छात्रावासों में अधीक्षक व्यवस्था को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इस पत्र में सामान्य प्रशासन विभाग के 5 मार्च 2019 के आदेश क्रमांक एफ 1-2/2015/1/एक का हवाला देते हुए नियमानुसार कार्रवाई और पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
एक शिक्षक, दो छात्रावास—व्यवस्था कैसे संभलेगी?
कुसमी विकासखंड में सामने आई जानकारी के अनुसार कुछ मामलों में एक ही शिक्षक अथवा शिक्षिका को एक से अधिक आश्रम-छात्रावासों की जिम्मेदारी दी गई है। बताया जा रहा है कि कुछ संस्थाएं एक-दूसरे से कई किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि एक ही व्यक्ति दोनों संस्थाओं में विद्यार्थियों की उपस्थिति, भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, अनुशासन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और अन्य दैनिक व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी आखिर कैसे करेगा?
यदि दोनों छात्रावासों में एक ही समय पर किसी प्रकार की आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए तो संबंधित प्रभारी किस संस्था में मौजूद रहेगा? यही सवाल अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
दूसरे विकासखंड से शिक्षक लाकर दो संस्थाओं का प्रभार?
मामले में एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। बताया जा रहा है कि दूसरे विकासखंड में पदस्थ एक शिक्षक को कुसमी विकासखंड में लाकर दो अलग-अलग आश्रम-छात्रावासों का प्रभार सौंपा गया है।
यदि यह व्यवस्था सही है तो यह जानना जरूरी है कि संबंधित शिक्षक को कुसमी में लाने के लिए कौन सा आदेश जारी किया गया? उनकी मूल पदस्थापना कहां है? क्या विभाग से आवश्यक एनओसी ली गई? उन्हें दो संस्थाओं का प्रभार देने का प्रशासनिक आधार क्या है?
इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
13 सितंबर 2023 के पत्र ने बढ़ाई जिम्मेदारी की गंभीरता
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार 13 सितंबर 2023 के पत्र में 5 मार्च 2019 के सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश का उल्लेख किया गया था। उक्त व्यवस्था में अधीक्षक पद की स्थिति और पद भरे जाने तक प्रभार/प्रतिनियुक्ति से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का अवलोकन करते हुए नियमानुसार कार्रवाई एवं पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा था।
इसके बावजूद यदि वर्तमान में एक ही शिक्षक को दो संस्थाओं का प्रभार दिया गया है, तो यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित प्रभार किस आदेश और किस नियम के तहत दिया गया है।
बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल, जवाबदेही किसकी?
आश्रम-छात्रावासों में रहने वाले अधिकांश विद्यार्थी नियमित रूप से विभागीय व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अधीक्षक की भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की दैनिक सुरक्षा और आवश्यकताओं से भी जुड़ी होती है।
एक ही व्यक्ति के पास दो संस्थाओं का प्रभार होने पर यदि किसी छात्र की तबीयत बिगड़ती है, सुरक्षा संबंधी घटना होती है, भोजन व्यवस्था में समस्या आती है या किसी अन्य आपात स्थिति से निपटना पड़ता है, तो तत्काल जिम्मेदारी कौन संभालेगा—यह सवाल विभागीय व्यवस्था की गंभीरता को सामने लाता है।
मंडल संयोजक बोले—एनओसी के बाद ही बनाए गए अधीक्षक
मामले में मंडल संयोजक का कहना है कि जिन लोगों को हॉस्टल अधीक्षक बनाया गया है, उन्होंने एनओसी दी है और उसके बाद ही उन्हें अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है।
मंडल संयोजक के अनुसार विभाग की ओर से अब एक नया आदेश भी प्राप्त हुआ है, जिसके तहत एक सप्ताह के भीतर सभी छात्रावासों में एक-एक अधीक्षक की व्यवस्था करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मंडल संयोजक के इस बयान के बाद अब विभाग की आगामी कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है।
क्या नया आदेश खत्म करेगा दोहरी प्रभार व्यवस्था?
यदि विभाग के नए आदेश के अनुसार प्रत्येक छात्रावास में अलग-अलग अधीक्षक की व्यवस्था कर दी जाती है, तो वर्तमान विवाद काफी हद तक समाप्त हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि जब विभागीय स्तर पर ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई है, तो पूर्व में एक शिक्षक को दो संस्थाओं की जिम्मेदारी देने का आधार क्या था?
क्या सभी प्रभार आदेश नियमों के अनुरूप जारी हुए थे? क्या संबंधित शिक्षकों की एनओसी और पदस्थापना की स्थिति स्पष्ट है? क्या दूसरे विकासखंड से शिक्षक को कुसमी लाने का कोई विधिवत प्रशासनिक आदेश है?
इन सवालों पर विभाग की स्पष्ट जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
विभाग से दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि कुसमी विकासखंड के सभी आश्रम-छात्रावासों की वर्तमान अधीक्षक एवं प्रभारी सूची सार्वजनिक की जाए। साथ ही प्रत्येक प्रभारी की मूल पदस्थापना, प्रभार आदेश क्रमांक एवं दिनांक, एनओसी तथा दोहरी जिम्मेदारी दिए जाने के कारणों की जानकारी भी स्पष्ट की जाए।
विशेष रूप से दूसरे विकासखंड से शिक्षक को कुसमी लाकर दो संस्थाओं का प्रभार दिए जाने की बात सही है तो संबंधित आदेश और प्रशासनिक आधार भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
अब सबकी निगाह विभाग की कार्रवाई पर
फिलहाल पूरा मामला दस्तावेजों और विभागीय आदेशों के परीक्षण का विषय है। केवल आरोपों के आधार पर किसी अधिकारी या कर्मचारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि एक शिक्षक को वास्तव में दो-दो संस्थाओं का प्रभार दिया गया है और वह भी दूसरे विकासखंड से लाकर, तो विभाग को इसकी नियमसम्मतता और प्रशासनिक आवश्यकता स्पष्ट करनी होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या कुसमी के सभी आश्रम-छात्रावासों में एक-एक अधीक्षक की व्यवस्था एक सप्ताह के भीतर वास्तव में लागू होगी, या दोहरी प्रभार व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी? विभाग की आगामी कार्रवाई से ही स्थिति पूरी तरह साफ होगी।
