बलरामपुर,,रघुनाथनगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: मवेशी तस्करी के संगठित नेटवर्क पर शिकंजा, पांच और आरोपी गिरफ्तार

Samwad Chhattisgarh

✍🏻✍🏻 संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर ✍🏻✍🏻

केसारी गांव से 34 भैंस-भैंसों की जब्ती के मामले में पुलिस को मिली सफलता, लोकल एजेंट से लेकर अंतरराज्यीय परिवहनकर्ताओं तक नेटवर्क की भूमिका आई सामने

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले में मवेशी तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत रघुनाथनगर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मवेशियों की अवैध तस्करी से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के मामले में पुलिस ने पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में स्थानीय स्तर पर मवेशियों की खरीद-बिक्री कराने वाले एजेंटों से लेकर मवेशियों को उत्तर प्रदेश पहुंचाने वाले परिवहनकर्ता तक शामिल हैं। इस मामले में पुलिस पहले ही एक आरोपी को गिरफ्तार कर 34 भैंस-भैंसों को जब्त कर चुकी है। वहीं, 8 अक्टूबर 2026 को कथित मास्टरमाइंड और स्थानीय सप्लायर जितेन्द्र जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में अन्य आरोपियों के नाम सामने आए थे।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध और मवेशियों के अवैध परिवहन से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है। मामले में पुलिस की जांच जारी है और तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

मुखबिर की सूचना पर केसारी गांव में की गई घेराबंदी

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक बलरामपुर एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के दिशा-निर्देश पर जिले में पशु तस्करी के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 16 सितंबर 2026 को थाना रघुनाथनगर पुलिस की टीम क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग केसारी गांव से मवेशियों को अवैध रूप से पैदल उत्तर प्रदेश की ओर ले जा रहे हैं।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने केसारी गांव में घेराबंदी की। पुलिस को देखकर मवेशियों को ले जा रहे लोगों ने भागने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस ने दीपक सोनवानी, पिता गोपीचंद सोनवानी, उम्र 24 वर्ष, निवासी केसारी, थाना रघुनाथनगर को मौके से गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान कुल 34 भैंस-भैंसों को जब्त किया गया, जबकि अन्य आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए थे।

इसके बाद पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी रही। मामले में 8 अक्टूबर 2026 को जितेन्द्र जायसवाल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, उससे पूछताछ के दौरान मवेशी तस्करी के नेटवर्क में शामिल पांच अन्य लोगों के नाम सामने आए।

पांच आरोपियों को दबिश देकर किया गिरफ्तार

पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी। इस कार्रवाई में रमजान अंसारी, जैनुल अंसारी, एनुल्लाह अंसारी, ईसराज अहमद और तस्लिम को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में इन आरोपियों की भूमिकाएं अलग-अलग बताई गई हैं। कुछ आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों से मवेशियों की खरीद और सप्लाई कराने में कथित रूप से शामिल थे, जबकि अन्य पर छत्तीसगढ़-उत्तर प्रदेश सीमा के पास मवेशियों को पिकअप वाहन के माध्यम से उत्तर प्रदेश पहुंचाने का आरोप है।

कौन क्या करता था? पुलिस ने बताई आरोपियों की भूमिका

1. एनुल्लाह अंसारी — स्थानीय एजेंट और सप्लायर

पुलिस के मुताबिक, एनुल्लाह अंसारी, पिता बुर मोहम्मद अंसारी, उम्र 37 वर्ष, निवासी कल्याणपुर, थाना गढ़वा, जिला गढ़वा (झारखंड), वर्तमान निवासी पहिया, थाना चंदौरा, जिला सूरजपुर, मवेशियों की खरीद और सप्लाई के लिए स्थानीय एजेंट के रूप में काम करता था। आरोप है कि वह बलरामपुर, सूरजपुर और सरगुजा जिले के अलग-अलग गांवों के किसानों से कम कीमत पर मवेशी खरीदकर उन्हें जंगल और सीमावर्ती रास्तों के जरिए दूसरे राज्यों में पहुंचाने वाले नेटवर्क को सौंपता था। पुलिस के अनुसार, उसका नाम पहले भी चलगली थाना क्षेत्र के एक पशु तस्करी मामले में सामने आया था।

2. जैनुल अंसारी — खरीद-बिक्री में मध्यस्थ की भूमिका

जैनुल अंसारी, पिता मोहम्मद रफीक अंसारी, उम्र 50 वर्ष, निवासी नरौला, चौकी रेवटी, थाना चंदौरा, जिला सूरजपुर, पर पशु तस्करी से जुड़े लोगों के लिए मध्यस्थ के रूप में काम करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, वह आसपास के गांवों से भैंसों की खरीद कराने, उन्हें संबंधित लोगों तक पहुंचाने और इस काम के बदले कमीशन लेने में शामिल था। उस पर मवेशियों को पैदल हांककर अंतरराज्यीय सीमा तक ले जाने की भूमिका भी बताई गई है।

3. रमजान अंसारी — स्थानीय स्तर पर मवेशियों की व्यवस्था

रमजान अंसारी, पिता नबी रसूल अंसारी, उम्र 35 वर्ष, निवासी डाइकरवा, चौकी रेवटी, थाना चंदौरा, जिला सूरजपुर, पर भी स्थानीय एजेंट और मध्यस्थ के रूप में काम करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, वह कथित तौर पर तस्करी नेटवर्क के लिए आसपास के गांवों से भैंसों की खरीद करवाता था और उन्हें आगे भेजने की व्यवस्था करता था। इसके बदले कमीशन लेने तथा मवेशियों को पैदल सीमा तक ले जाने में उसकी भूमिका बताई गई है।

4. ईसराज अहमद — उत्तर प्रदेश तक मवेशियों को पहुंचाने का आरोप

ईसराज अहमद, पिता रजीम, उम्र 33 वर्ष, निवासी बहहोर, थाना बभनी, जिला सोनभद्र (उत्तर प्रदेश), पर पशु तस्करी नेटवर्क में परिवहनकर्ता की भूमिका निभाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, वह छत्तीसगढ़-उत्तर प्रदेश सीमा पर केसारी गांव से सटे जंगल के पार मवेशियों को पिकअप वाहन में लोड कर उत्तर प्रदेश ले जाता था और वहां नेटवर्क से जुड़े बड़े एजेंटों को सौंपता था।

5. तस्लिम — परिवहन नेटवर्क से जुड़ा आरोपी

तस्लिम, पिता ईदू, उम्र 27 वर्ष, निवासी बड़होर, थाना बभनी, जिला सोनभद्र (उत्तर प्रदेश), पर भी ईसराज अहमद के साथ परिवहनकर्ता के रूप में काम करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, उसकी भूमिका केसारी गांव से लगे सीमावर्ती जंगल के रास्ते मवेशियों को पिकअप में लोड कर उत्तर प्रदेश पहुंचाने और वहां आगे सौंपने से जुड़ी थी।

संगठित नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही पुलिस

इस प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई से मवेशियों की कथित अवैध खरीद, स्थानीय स्तर पर सप्लाई, सीमावर्ती रास्तों से परिवहन और दूसरे राज्य में आगे सौंपने की प्रक्रिया की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, मवेशियों की खरीद-बिक्री और परिवहन के तरीकों की जांच कर रही है।

मामले में थाना रघुनाथनगर में अपराध क्रमांक 110/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(2), छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 4, 6 और 10 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(घ) के अंतर्गत प्रकरण दर्ज है।

पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में मवेशी तस्करी पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, मामले में आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। फिलहाल पुलिस आगे की विवेचना में जुटी हुई है।

नोट: यह समाचार पुलिस द्वारा जारी जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपियों के विरुद्ध आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

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