कुसमी,,कलेक्टर बनीं शिक्षिका ,बच्चों को सिखाया अंग्रेजी के सही उच्चारण का तरीका।

Samwad Chhattisgarh

     दूरस्थ प्राथमिक शाला फुतूरटोली पहुंचीं कलेक्टर

नन्हें विद्यार्थियों से  विभिन्न विषयों से संबंधित सवाल पूछ परखी सीखने की गुणवत्ता

✍🏻 संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर

बलरामपुर, 16 जुलाई 2026/ कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी जिले के दूरस्थ क्षेत्र विकासखंड कुसमी अंतर्गत स्थित प्राथमिक शाला फुतूरटोली पहुंचीं, जहां उन्होंने एक शिक्षक की भूमिका निभाते हुए बच्चों की पढ़ाई का स्तर परखा। उन्होंने बच्चों से सीधे संवाद किया, अंग्रेजी और गणित के सवाल पूछे तथा उनके सीखने की क्षमता का आकलन किया। साथ ही शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान शिक्षिका ने बताया कि विद्यालय में पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं संचालित हैं। विद्यालय में कुल 13 विद्यार्थी नामांकित हैं और आज विद्यालय में 9 विद्यार्थी उपस्थित है। कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति तथा अनुपस्थित बच्चों के पालकों से संपर्क कर बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने बच्चों से पाठ्यक्रम से जुड़े प्रश्न पूछे और ब्लैकबोर्ड पर गणित के सवाल हल करवाए। कक्षा चौथी की छात्रा गुंजन केरकेट्टा ने ब्लैकबोर्ड पर गणित के गुणा के प्रश्नों का सही उत्तर दिया और 12 तक का पहाड़ा सुनाया। कक्षा पांचवीं का छात्र टार्जन किंडो ने भी आत्मविश्वास के साथ पहाड़ा सुनाया।
तत्पश्चात कलेक्टर ने बच्चों से अंग्रेजी विषय से संबंधित सवाल पूछते हुए विभिन्न जानवरों के नाम पूछे। बच्चों ने बिना झिझक प्रश्नों का उत्तर दिया।

इस दौरान कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने बच्चों को अंग्रेजी शब्दों के सही उच्चारण का अभ्यास कराया और बताया कि शब्दों को स्पष्ट एवं सही तरीके से बोलने का नियमित अभ्यास करने से भाषा पर अच्छी पकड़ बनती है। उन्होंने बच्चों से विभिन्न जानवरों के नाम अंग्रेजी में बुलवाए और उनके उच्चारण में आवश्यक सुधार भी कराया। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ अभ्यास किया । बच्चों का आत्मविश्वास और सीखने के प्रति उत्साह देखकर कलेक्टर ने उनकी सराहना की।

कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने शिक्षकों से कहा कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति अलग होती है, इसलिए कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें अतिरिक्त समय और विशेष मार्गदर्शन दे। उन्होंने कहा कि नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण अध्यापन और सतत अभ्यास से ही बच्चों की मजबूत शैक्षणिक नींव तैयार की जा सकती है और उनका बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

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