बलरामपुर,,शासन के आदेश के बावजूद शंकरगढ़ के प्रधानपाठक को कुसमी में मंडल संयोजक का प्रभार! शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

Samwad Chhattisgarh

✍️✍️संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर ✍️✍️

शासन के आदेश के बावजूद शंकरगढ़ के प्रधानपाठक को कुसमी में मंडल संयोजक का प्रभार! शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल



7 जुलाई 2026 के आदेश में संलग्न कर्मचारियों को मूल पदस्थापना संस्था में लौटाने के निर्देश, फिर दूसरे विकासखंड में जिम्मेदारी किस आदेश के तहत? बीईओ शंकरगढ़ ने कहा—उच्च अधिकारी ही बताएंगे

लोकेशन: कुसमी / बलरामपुर-रामानुजगंज।

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक आदेशों के पालन और विभागीय व्यवस्था को लेकर एक नया सवाल सामने आया है। शासन स्तर से संलग्नीकरण समाप्त कर कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना संस्था में वापस भेजने के निर्देश जारी होने के बावजूद शंकरगढ़ विकासखंड में पदस्थ एक प्रधानपाठक को कुसमी विकासखंड में मंडल संयोजक की जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इस मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के आदेशों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले में सबसे अहम बात यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रामानुजगंज द्वारा 7 जुलाई 2026 को जारी आदेश में विभाग के अन्य कार्यालयों एवं संस्थाओं में संलग्न कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना संस्था में कार्यभार ग्रहण कराने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि किसी कर्मचारी को दूसरे विकासखंड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि इसके पीछे विभागीय प्रक्रिया और सक्षम अधिकारी का आदेश क्या है।

      7 जुलाई के आदेश में क्या दिए गए थे निर्देश?

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रामानुजगंज द्वारा जारी आदेश क्रमांक 16922/जि.शि.अधि./स्कूल शिक्षा/2026 में संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ रायपुर के पत्र क्रमांक एम.आई.एस./N-123/445, दिनांक 25 जून 2026 का हवाला दिया गया है।

इस आदेश में शिक्षा विभाग के अंतर्गत अपने मूल पदांकित कार्यालय अथवा संस्था से अन्य कार्यालयों एवं संस्थाओं में संलग्न कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना संस्था के लिए एकतरफा कार्यमुक्त किए जाने का उल्लेख किया गया है।

इतना ही नहीं, आदेश में जुलाई 2026 के वेतन आहरण को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित कर्मचारियों की मूल पदस्थापना संस्था में उपस्थिति दर्ज होने के उपरांत ही वेतन आहरण की कार्रवाई की जाए।

इस आदेश का उद्देश्य विभागीय संलग्नीकरण की व्यवस्था को समाप्त कर कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना संस्था में वापस भेजना बताया गया है।

     शंकरगढ़ में पदस्थ प्रधानपाठक को कुसमी में मंडल संयोजक की जिम्मेदारी कैसे?

इसी आदेश के बीच अब एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार शंकरगढ़ विकासखंड में पदस्थ एक प्रधानपाठक कुसमी विकासखंड में मंडल संयोजक के रूप में कार्य कर रहे हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब विभागीय आदेश के माध्यम से संलग्न कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना संस्था में वापस भेजने के निर्देश दिए गए थे, तो शंकरगढ़ में पदस्थ प्रधानपाठक को कुसमी विकासखंड में मंडल संयोजक की जिम्मेदारी किस आधार पर सौंपी गई?

क्या संबंधित प्रधानपाठक को कुसमी में मंडल संयोजक का प्रभार देने के लिए कोई पृथक आदेश जारी किया गया है? यदि हां, तो वह आदेश किस अधिकारी द्वारा जारी किया गया और क्या इसके लिए सक्षम स्तर से अनुमति प्राप्त की गई है?

इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि शासन के निर्देशों और वर्तमान विभागीय व्यवस्था के बीच स्थिति स्पष्ट हो सके।

बीईओ शंकरगढ़ से पूछने पर मिला जवाब—’उच्च अधिकारी ही बताएंगे’

इस मामले को लेकर जब शंकरगढ़ विकासखंड शिक्षा अधिकारी से संबंधित प्रधानपाठक के कुसमी विकासखंड में मंडल संयोजक के रूप में कार्य करने तथा उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपे जाने के संबंध में जानकारी मांगी गई, तो बीईओ शंकरगढ़ ने जवाब देते हुए कहा— “उच्च अधिकारी ही बताएंगे, जिसने आदेश किया है।”

बीईओ के इस जवाब के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। यदि संबंधित प्रधानपाठक को कुसमी में मंडल संयोजक का प्रभार किसी आदेश के तहत दिया गया है, तो उस आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारियों के पास उपलब्ध होनी चाहिए।

अब सवाल यह है कि आखिर वह आदेश किस सक्षम अधिकारी ने जारी किया है और क्या इस व्यवस्था की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को है?

 आदेश और जमीनी व्यवस्था में तालमेल पर सवाल

एक तरफ शिक्षा विभाग के जिला कार्यालय द्वारा संलग्नीकरण समाप्त करने और कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना संस्था में वापस भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं। दूसरी तरफ शंकरगढ़ में पदस्थ प्रधानपाठक का कुसमी विकासखंड में मंडल संयोजक के रूप में कार्य करना विभागीय व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

हालांकि, केवल दूसरे विकासखंड में जिम्मेदारी निभाने से यह स्वतः साबित नहीं होता कि संबंधित कर्मचारी का संलग्नीकरण नियम विरुद्ध है। संभव है कि उन्हें मंडल संयोजक का प्रभार देने के लिए कोई पृथक आदेश या प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई हो। लेकिन ऐसी स्थिति में उस आदेश का सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना जरूरी है।

शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को देना चाहिए जवाब

मामले में जिला शिक्षा अधिकारी एवं संबंधित उच्च अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि संबंधित प्रधानपाठक की मूल पदस्थापना वर्तमान में किस संस्था में है? क्या वे कुसमी में मंडल संयोजक का प्रभार किसी पृथक आदेश के तहत संभाल रहे हैं? यदि हां, तो आदेश किस सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया है और क्या यह व्यवस्था 7 जुलाई 2026 के विभागीय आदेश के अनुरूप है?

शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पारदर्शिता और आदेशों के समान रूप से पालन की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। ऐसे में इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना आवश्यक है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 7 जुलाई 2026 के आदेश में संलग्न कर्मचारियों को मूल पदस्थापना संस्था में वापस भेजने के निर्देश दिए गए थे, तो शंकरगढ़ में पदस्थ प्रधानपाठक को कुसमी विकासखंड में मंडल संयोजक का प्रभार किस आदेश और किस सक्षम अधिकारी की अनुमति से दिया गया?

फिलहाल इस संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

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