✍️✍️ संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर✍️✍️

चेकडैम निर्माण में गड़बड़ी पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन, तकनीकी सहायक की संविदा सेवा समाप्त; 9.13 लाख रुपये की वसूली के निर्देश

17 चेकडैम निर्माण कार्यों का भुगतान रोका गया, दो तकनीकी सहायकों पर अर्थदंड, चार अधिकारियों-कर्मचारियों से मांगा गया जवाब
बलरामपुर। जिले में शासकीय निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। चेकडैम निर्माण कार्यों में तकनीकी खामियां और अनियमितताएं सामने आने के बाद कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देश पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत जनपद पंचायत राजपुर में पदस्थ तकनीकी सहायक रोहित कुमार की संविदा सेवा समाप्त कर दी गई है। वहीं, तीन तकनीकी सहायकों से कुल 9.13 लाख रुपये की वसूली के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही जांच के दायरे में आए सभी 17 चेकडैम निर्माण कार्यों का भुगतान रोक दिया गया है।
निर्माण कार्यों में लापरवाही और गुणवत्ता से समझौते को लेकर हुई इस कार्रवाई से संबंधित विभागों में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन ने न केवल निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी निभाने वाले तकनीकी कर्मचारियों पर कार्रवाई की है, बल्कि पर्यवेक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे वरिष्ठ अधिकारियों से भी जवाब तलब किया है।
समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के बाद शुरू हुई जांच
दरअसल, 12 मार्च 2026 को विभिन्न समाचार पत्रों में जिले में चेकडैम निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर खबरें प्रकाशित हुई थीं। इन खबरों को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच कराने का निर्णय लिया। राज्य कार्यालय के निर्देश पर मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) के माध्यम से जिले में निर्मित 17 चेकडैम कार्यों की तकनीकी जांच कराई गई।
जांच के दौरान कुछ निर्माण कार्यों में कंक्रीट की गुणवत्ता तथा उप-संरचनाओं के निर्माण में तकनीकी कमियां पाई गईं। जांच प्रतिवेदन में कंक्रीट की सतह पर प्लास्टर किए जाने का भी उल्लेख किया गया। इसके अलावा निर्माण कार्यों के मूल्यांकन में भी अनियमितता सामने आई और कुछ कार्यों का अधिक मूल्यांकन किया जाना पाया गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने संबंधित तकनीकी कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए आर्थिक दंड और वसूली की कार्रवाई शुरू की।
रोहित कुमार की संविदा सेवा समाप्त, तीन तकनीकी सहायकों से होगी वसूली
अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए जनपद पंचायत राजपुर में पदस्थ तकनीकी सहायक रोहित कुमार की संविदा सेवा 30 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालयीन आदेश के माध्यम से समाप्त कर दी गई है।
वहीं, तकनीकी सहायक रोहित कुमार, अविनाश भारती एवं कृपाशंकर गुप्ता से कुल 9.13 लाख रुपये की वसूली के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त तकनीकी सहायक अविनाश भारती और कृपाशंकर गुप्ता पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 की धारा 25 के तहत एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। दोनों तकनीकी सहायकों को भविष्य में ऐसी लापरवाही नहीं करने की अंतिम चेतावनी भी जारी की गई है।
17 चेकडैम कार्यों का भुगतान रोका, अधिकारियों से मांगा जवाब
जांच में सामने आई तकनीकी कमियों और अनियमितताओं के बाद जिला प्रशासन ने सभी 17 चेकडैम निर्माण कार्यों का भुगतान रोकने के निर्देश दिए हैं। इनमें 12 निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग बलरामपुर तथा 5 निर्माण कार्य जनपद पंचायत राजपुर के अंतर्गत शामिल हैं।
वहीं, निर्माण कार्यों की निगरानी और पर्यवेक्षण में लापरवाही की जिम्मेदारी तय करते हुए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग बलरामपुर के कार्यपालन अभियंता श्री सच्चिदानंद कांत तथा उप संभाग राजपुर के अनुविभागीय अधिकारी श्री जानूराम सोनवानी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है।
इसके अलावा जनपद पंचायत राजपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संजय दुबे एवं कार्यक्रम अधिकारी श्री मानसाय सिदार से भी जवाब मांगा गया है। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर का स्पष्ट संदेश- निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं
कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया है कि जिले में किसी भी योजना अथवा मद से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य है। निर्माण कार्यों में लापरवाही, तकनीकी खामी अथवा आर्थिक अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हो। प्रशासन की प्राथमिकता केवल निर्माण कार्यों को पूरा कराना नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत और टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण कराना है, जिनका लाभ ग्रामीणों को लंबे समय तक मिल सके।
इस कार्रवाई से जिला प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी योजनाओं के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

