
बलरामपुर में RTI कानून तार-तार: अपर कलेक्टर के न्यायिक आदेश को खनिज शाखा ने दिखाया ठेंगा,
हिंडाल्को माइंस की जानकारी दबाने पर अब राज्य सूचना आयोग करेगा फैसला

✍🏻 संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर
विशेष रिपोर्ट बलरामपुर-रामानुजगंज।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से प्रशासनिक तानाशाही और सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), 2005 की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ जिला कलेक्टर कार्यालय के अधीन संचालित खनिज शाखा के अधिकारी अपने ही वरिष्ठ अधिकारी यानी प्रथम अपीलीय अधिकारी (अपर कलेक्टर) के न्यायिक आदेश को ठेंगा दिखाए बैठे हैं।

सामरी क्षेत्र में कॉर्पोरेट कंपनी ‘हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ द्वारा किए जा रहे खनन कार्यों, पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की आशंकाओं और स्थानीय रोजगार के दावों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां, वरिष्ठ अधिकारी के कड़े रुख और स्पष्ट आदेश के बावजूद महीनों से दबाकर रखी गई हैं। अब इस प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ आवेदक ने सीधे छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग, नवा रायपुर का दरवाजा खटखटाया है।
क्या है पूरा मामला: सूचना के अधिकार से कॉर्पोरेट को बचाने की कवायद?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कसकेला निवासी आरटीआई कार्यकर्ता मोहम्मद गयासुद्दीन ने दिनांक 07 मार्च 2026 को भारत सरकार के ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल के माध्यम से एक विस्तृत आवेदन (ID: 220260307001575) खनिज शाखा, जिला बलरामपुर के समक्ष प्रस्तुत किया था। इस आवेदन के जरिए सामरी माइंस क्षेत्र में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड के:
बॉक्साइट खनन पट्टे (Mining Lease) का खसरा नंबर सहित प्रमाणित नक्शा।
पर्यावरण विभाग द्वारा जारी नवीनतम ‘सहमति’ (Consent to Operate) की प्रति।
कंपनी द्वारा किए गए वृक्षारोपण की शासकीय भौतिक सत्यापन (Physical Verification) रिपोर्ट।
जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) फंड के तहत पिछले 2 वर्षों में जमा राशि और प्रभावित गांवों में उसके व्यय का विवरण।
सामरी माइंस में स्थानीय (बलरामपुर जिले के) श्रमिकों को दिए गए श्रेणीवार (कुशल/अकुशल) रोजगार के आंकड़े।
खनन के दौरान उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए वाटर स्प्रेइंग (Water Spraying) की लॉग-बुक की प्रमाणित प्रति।
इन संवेदनशील और जनहित से जुड़े मुद्दों पर निर्धारित 30 दिनों के भीतर जनसूचना अधिकारी (खनिज शाखा) द्वारा पूरी तरह चुप्पी साध ली गई। कानून के मुताबिक समय पर जवाब न मिलना ‘सूचना देने से इनकार’ माना जाता है, जिससे क्षुब्ध होकर आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी (अपर कलेक्टर) के समक्ष अपील दायर की थी।
अपर कलेक्टर का कड़ा न्यायिक आदेश भी बेअसर
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए माननीय प्रथम अपीलीय अधिकारी (अपर कलेक्टर, जिला बलरामपुर) ने प्रथम अपील प्रकरण क्रमांक 14/2026 के तहत विधिवत सुनवाई की। जनसूचना अधिकारी की लापरवाही को देखते हुए अपर कलेक्टर ने दिनांक 15 मई 2026 को अंतिम आदेश पारित किया (जिसका पृष्ठांकन क्रमांक 3393/प्र.अ./14/2026 दिनांक 25/05/2026 है)।
अपर कलेक्टर ने अपने आदेश में खनिज शाखा को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए थे कि:
“जनसूचना अधिकारी एवं खनि अधिकारी (खनिज शाखा) जिला बलरामपुर-रामानुजगंज को निर्देशित किया जाता है कि अपीलार्थी/आवेदक द्वारा चाही गई वांछित जानकारी ‘निःशुल्क’ और ‘डाक के माध्यम से’ अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं तथा इस संबंध में कृत कार्यवाही से उच्च कार्यालय को अवगत कराना सुनिश्चित करें।”
बड़ा सवाल: जानकारी सार्वजनिक करने से क्यों कतरा रहा है खनिज विभाग?
अपर कलेक्टर के इस कड़े और स्पष्ट न्यायिक आदेश के पारित होने के बाद भी आज दिनांक तक खनिज शाखा कुंभकर्णी नींद में सोई हुई है। आवेदक मोहम्मद गयासुद्दीन को न तो चाही गई जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं और न ही विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का पत्र व्यवहार किया गया है।
यह स्थिति जिले के प्रशासनिक ढर्रे पर बड़े सवाल खड़े करती है। आखिर हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खनन कार्यों, वृक्षारोपण के दावों और स्थानीय आदिवासियों के रोजगार के आंकड़ों में ऐसा क्या छुपा है, जिसे दबाने के लिए खनिज विभाग अपने ही वरिष्ठ अधिकारी (अपर कलेक्टर) के आदेश की अवहेलना करने पर उतारू है? क्या विभाग नियमों को ताक पर रखकर किसी कॉर्पोरेट घराने को बचाने का प्रयास कर रहा है?
संवैधानिक मर्यादाओं के उल्लंघन पर अब राज्य सूचना आयोग करेगा न्याय
शासकीय तंत्र की इस बेलगाम मनमानी और आरटीआई कानून के खुले मखौल से तंग आकर अंततः आवेदक मोहम्मद गयासुद्दीन ने छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग, नवा रायपुर में द्वितीय अपील दर्ज करा दी है। आवेदक ने आयोग के समक्ष कड़ी कानूनी आपत्ति दर्ज कराते हुए मांग की है कि:
दंडात्मक कार्रवाई: आरटीआई अधिनियम की मूल आत्मा का हनन करने और दुर्भावनापूर्वक जानकारी छिपाने के अपराध में दोषी जनसूचना अधिकारी पर अधिनियम की धारा 20(1) के तहत नियमानुसार कड़ा वित्तीय जुर्माना लगाया जाए।
संवैधानिक कार्रवाई: एक लोक सेवक होने के नाते वरिष्ठ न्यायिक आदेश की जानबूझकर नाफरमानी करने के लिए दोषी अधिकारी के खिलाफ संवैधानिक मर्यादाओं और सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत अनुशासनात्मक व विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जाए।
यह मामला अब केवल सूचना के अधिकार का नहीं, बल्कि शासकीय सेवा में बैठे अधिकारियों की जवाबदेही का बन चुका है। बलरामपुर जिले के सजग नागरिक और बुद्धजीवी वर्ग अब टकटकी लगाए राज्य सूचना आयोग के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, ताकि भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों को यह कड़ा संदेश जाए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
