✍🏻✍🏻 संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर ✍🏻✍🏻

जमीरा माइंस में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, ब्लास्टिंग के दौरान शेल्टर की जगह हाइवा के इस्तेमाल का आरोप

CMDC की बॉक्साइट खदान में श्रमिकों की सुरक्षा, खुले में घूमते मवेशियों और पेयजल व्यवस्था को लेकर चिंता; संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच और निरीक्षण की मांग

जमीरा पाठ, कुसमी/बलरामपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत जमीरा पाठ स्थित सीएमडीसी (CMDC) की बॉक्साइट खदान में सुरक्षा व्यवस्था और श्रमिकों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। खदान में ब्लास्टिंग जैसी जोखिमपूर्ण गतिविधि के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होने, निर्धारित मानकों का पालन किए जाने तथा श्रमिकों को सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने को लेकर चिंता जताई जा रही है। वहीं, खदान परिसर में मवेशियों के खुलेआम घूमने और पेयजल व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

खनन कार्य में सुरक्षा नियमों का पालन श्रमिकों के जीवन की रक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में जमीरा माइंस में सामने आए इन मुद्दों की संबंधित विभाग द्वारा जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
ब्लास्टिंग के दौरान शेल्टर की जगह हाइवा का इस्तेमाल?
जमीरा माइंस में सबसे गंभीर सवाल ब्लास्टिंग के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौके पर निर्धारित सुरक्षा शेल्टर की व्यवस्था स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देने की बात सामने आई है। इस संबंध में CMDC के अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर बताया गया कि ब्लास्टिंग के दौरान शेल्टर की जगह हाइवा वाहन का उपयोग किया जाता है।
अधिकारियों के इस कथित जवाब के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ब्लास्टिंग के दौरान हाइवा वाहन को सुरक्षा शेल्टर के विकल्प के रूप में किस आधार पर इस्तेमाल किया जा रहा है? क्या इस व्यवस्था को संबंधित सुरक्षा मानकों के अनुरूप निर्धारित किया गया है? क्या इसके लिए सक्षम तकनीकी अधिकारियों की स्वीकृति और जोखिम का आकलन किया गया है?
ब्लास्टिंग के दौरान विस्फोट से पत्थर, मलबा और अन्य सामग्री दूर तक उछल सकती है। ऐसी स्थिति में श्रमिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है। केवल किसी भारी वाहन की उपलब्धता को सुरक्षित शेल्टर का विकल्प मान लेना उचित है या नहीं, यह संबंधित तकनीकी और सुरक्षा मानकों के आधार पर ही तय किया जा सकता है।
इसलिए आवश्यक है कि सक्षम खनन एवं सुरक्षा अधिकारी मौके का निरीक्षण कर यह स्पष्ट करें कि ब्लास्टिंग के समय श्रमिकों को कहां और किस प्रकार सुरक्षित रखा जाता है। साथ ही, हाइवा के इस्तेमाल संबंधी दावे की भी तकनीकी जांच की जाए, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते दूर किया जा सके।
माइंस परिसर में खुलेआम घूम रहे मवेशी, निगरानी व्यवस्था पर सवाल
खदान परिसर में मवेशियों के खुलेआम घूमते दिखाई देने की बात भी सामने आई है। यह स्थिति खदान क्षेत्र की निगरानी और प्रवेश नियंत्रण व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती है। जिस परिसर में भारी वाहनों की आवाजाही, खनन कार्य और ब्लास्टिंग जैसी गतिविधियां होती हैं, वहां मवेशियों का प्रवेश संभावित दुर्घटना का कारण बन सकता है।
यदि खदान परिसर में मवेशियों का प्रवेश बेरोकटोक हो रहा है, तो यह जानना जरूरी है कि प्रवेश द्वारों, सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं। क्या परिसर की नियमित निगरानी होती है? क्या मवेशियों को खदान क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है? और यदि ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं, तो उन्हें रोकने के लिए प्रबंधन ने क्या कदम उठाए हैं?
ये सवाल केवल खदान प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खदान में काम करने वाले श्रमिकों और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा से भी जुड़े हैं। संबंधित अधिकारियों को इस पहलू की जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।
पूर्व में भी चली थी खबर यह कि सुविधाओं के मामले पर लेकिन आज तक किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं पेयजल व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
जमीरा माइंस में श्रमिकों के लिए उपलब्ध पेयजल सुविधा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मौके पर व्यवस्थित पेयजल व्यवस्था के बजाय एक गड्ढेनुमा स्थान के पास पानी की बोतलें भरी हुई दिखाई देने की बात सामने आई है। हालांकि, पानी के स्रोत, उसकी गुणवत्ता और इस्तेमाल की वास्तविक स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इस दृश्य ने श्रमिकों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल जरूर खड़े किए हैं।
खनन कार्य में लगे श्रमिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना कार्यस्थल की आवश्यक सुविधाओं में शामिल है। विशेषकर कठिन परिस्थितियों और शारीरिक मेहनत वाले काम में स्वच्छ पानी की उपलब्धता श्रमिकों के स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
ऐसे में यह जांच की जानी चाहिए कि खदान में श्रमिकों के लिए पेयजल का स्रोत क्या है, पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच होती है या नहीं और पीने के पानी को सुरक्षित रखने के लिए कौन-सी व्यवस्था अपनाई गई है। यदि पेयजल व्यवस्था में कोई कमी पाई जाती है, तो प्रबंधन को तत्काल सुधार करना चाहिए।
श्रमिकों की सुरक्षा और सुविधाओं की जिम्मेदारी किसकी?
जमीरा माइंस में सामने आए तीन प्रमुख मुद्दे—ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, परिसर में मवेशियों की आवाजाही और पेयजल सुविधा—खदान प्रबंधन की जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं।
खनन कार्य जोखिमपूर्ण होता है। इसलिए सुरक्षा नियमों का पालन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा से जुड़ा विषय है। ब्लास्टिंग से पहले और उसके दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन, अनधिकृत प्रवेश पर नियंत्रण, कार्यस्थल की नियमित निगरानी तथा स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यदि खदान में सुरक्षा संबंधी किसी व्यवस्था को निर्धारित मानकों के स्थान पर वैकल्पिक तरीके से संचालित किया जा रहा है, तो उसकी उपयुक्तता और वैधता की पुष्टि सक्षम अधिकारियों से कराई जानी चाहिए। इससे न केवल श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।
निष्पक्ष जांच और मौके के निरीक्षण की जरूरत
जमीरा माइंस से जुड़े इन सवालों के बीच अब संबंधित खनन विभाग और सक्षम सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। आवश्यक है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर ब्लास्टिंग के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रिया, शेल्टर की उपलब्धता, हाइवा के कथित इस्तेमाल, मवेशियों के प्रवेश पर नियंत्रण और पेयजल व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें।
निरीक्षण के दौरान श्रमिकों से भी जानकारी ली जानी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि उन्हें काम के दौरान किस प्रकार की सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं और किसी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की क्या व्यवस्था है। पेयजल के नमूनों की जांच तथा परिसर की निगरानी व्यवस्था का आकलन भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए।
हादसे से पहले जागेंगे जिम्मेदार या इंतजार होगा किसी बड़ी घटना का?
जमीरा माइंस में उठ रहे सवालों का जवाब तथ्यों और निष्पक्ष जांच के आधार पर सामने आना चाहिए। क्या ब्लास्टिंग के दौरान हाइवा का इस्तेमाल निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप है? क्या श्रमिकों को सुरक्षित स्थान और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं? खदान परिसर में मवेशियों का प्रवेश कैसे हो रहा है? और पेयजल व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या है?
इन सभी सवालों पर CMDC प्रबंधन और संबंधित विभाग की स्पष्ट प्रतिक्रिया जरूरी है। समय रहते कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाना चाहिए, ताकि किसी संभावित दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने की नौबत न आए।
फिलहाल, जमीरा माइंस से संबंधित इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। CMDC प्रबंधन का विस्तृत पक्ष भी सामने आना शेष है। प्रबंधन का जवाब मिलने पर उसे समाचार में उचित स्थान दिया जाना चाहिए। संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया से ही सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

