✍🏻✍🏻 संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर ✍🏻✍🏻

जमीरा माइंस में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल: बिना शेल्टर ब्लास्टिंग कैसे? हाईवा से 300 मीटर दूरी रखने का अधिकारी ने दिया तर्क

CMDC की जमीरा माइंस में श्रमिकों की सुरक्षा, पेयजल और मवेशियों की आवाजाही को लेकर उठे सवाल; अधिकारी दीपक गुप्ता के बयान के बाद जांच की मांग तेज, SDM ने जानकारी लेकर कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट करने का दिया आश्वासन

जमीरा पाठ, कुसमी, बलरामपुर।
बलरामपुर जिले के विकासखंड कुसमी अंतर्गत जमीरा पाठ स्थित सीएमडीसी (CMDC) की जमीरा माइंस में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खनन जैसे जोखिमपूर्ण कार्य में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम, ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षित स्थान की उपलब्धता, माइंस परिसर में मवेशियों की बेरोकटोक आवाजाही और श्रमिकों के लिए पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं अब चर्चा का विषय बन गई हैं। सबसे गंभीर सवाल ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा शेल्टर की व्यवस्था को लेकर सामने आया है। इस संबंध में CMDC के अधिकारी दीपक गुप्ता से जानकारी मांगे जाने पर हाईवा से 300 मीटर की दूरी रखने की बात कही गई। हालांकि, इस दूरी का निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया से क्या संबंध है और मौके पर ब्लास्टिंग के दौरान किन सुरक्षा उपायों का पालन किया जाता है, यह स्पष्ट होना बाकी है।

मामले में एसडीएम ने भी जानकारी लेकर तथ्यों से अवगत कराने का आश्वासन दिया है। ऐसे में अब निगाहें जिला प्रशासन, खनन विभाग और संबंधित प्रबंधन पर टिकी हैं कि इन सवालों की जांच कब होती है और माइंस में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।
ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा शेल्टर कहां? अधिकारी के बयान ने बढ़ाए सवाल
जमीरा माइंस में सबसे अहम सवाल ब्लास्टिंग के दौरान श्रमिकों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था को लेकर है। खदान में विस्फोटक पदार्थों के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि ब्लास्टिंग के समय श्रमिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, निर्धारित क्षेत्र को खाली कराने और संभावित खतरे से बचाने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
इस संबंध में CMDC के अधिकारी दीपक गुप्ता से फोन पर जानकारी मांगी गई। बातचीत के दौरान अधिकारी ने कहा कि यदि शेल्टर नहीं है, तो हाईवा से 300 मीटर की दूरी रखकर ब्लास्टिंग की जा सकती है।
अधिकारी के इस कथन के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं। क्या माइंस में श्रमिकों के लिए निर्धारित सुरक्षित स्थान उपलब्ध है? यदि शेल्टर नहीं है, तो ब्लास्टिंग के दौरान श्रमिकों को सुरक्षित रखने के लिए कौन-सी वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जाती है? हाईवा से 300 मीटर की दूरी रखने का आधार क्या है और क्या यह दूरी संबंधित ब्लास्टिंग योजना तथा लागू सुरक्षा मानकों के अनुरूप है?
इन सवालों का जवाब केवल मौखिक जानकारी से नहीं, बल्कि माइंस में अपनाई जा रही वास्तविक प्रक्रिया, सुरक्षा अभिलेखों और संबंधित अधिकारियों के निरीक्षण से ही स्पष्ट हो सकता है।
माइंस परिसर में खुलेआम घूमते मवेशी, निगरानी व्यवस्था पर सवाल
जमीरा माइंस में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दूसरा गंभीर विषय परिसर में मवेशियों की आवाजाही है। मौके पर सामने आए दृश्यों में माइंस परिसर के भीतर मवेशी घूमते दिखाई दिए। इससे खदान की सीमाओं की सुरक्षा, प्रवेश नियंत्रण और नियमित निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
खनन क्षेत्र में भारी मशीनों, वाहनों और ब्लास्टिंग जैसी गतिविधियों के बीच मवेशियों की मौजूदगी जोखिम पैदा कर सकती है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि मवेशी परिसर में किस रास्ते से प्रवेश कर रहे हैं और उन्हें रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं।
सवाल यह भी है कि ब्लास्टिंग से पहले प्रभावित क्षेत्र की निगरानी कैसे की जाती है? क्या संबंधित क्षेत्र को सुरक्षित कर अनधिकृत प्रवेश रोका जाता है? क्या ब्लास्टिंग से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि संभावित खतरे वाले क्षेत्र में श्रमिक, पशु या अन्य लोग मौजूद न हों?
इन बिंदुओं की जांच से ही स्पष्ट होगा कि माइंस में सुरक्षा निगरानी कितनी प्रभावी है और कहां सुधार की आवश्यकता है।
श्रमिकों के लिए पेयजल की व्यवस्था भी जांच के दायरे में
खनन कार्य के दौरान श्रमिकों को स्वच्छ पेयजल और आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है। जमीरा माइंस में पेयजल की उपलब्धता और व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
अब यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि माइंस में काम करने वाले श्रमिकों के लिए पीने के पानी की क्या व्यवस्था है? क्या पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाती है? श्रमिकों के विश्राम के लिए उचित स्थान उपलब्ध है या नहीं? इसके अलावा, कार्यस्थल पर प्राथमिक उपचार और आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं?
ये ऐसे बुनियादी विषय हैं, जिनकी अनदेखी श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए संबंधित प्रबंधन को इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
CMDC प्रबंधन से स्पष्ट जवाब की जरूरत
जमीरा माइंस में उठे सवालों को लेकर CMDC अधिकारी दीपक गुप्ता का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। ब्लास्टिंग के दौरान शेल्टर के संबंध में उन्होंने हाईवा से 300 मीटर की दूरी रखने की बात कही। हालांकि, ब्लास्टिंग की स्वीकृत प्रक्रिया, श्रमिकों के सुरक्षित स्थान और अन्य सुरक्षा उपायों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
ऐसे में CMDC प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि माइंस में ब्लास्टिंग किस स्वीकृत योजना के तहत की जाती है और इसके दौरान श्रमिकों को सुरक्षित रखने के लिए कौन-कौन से उपाय अपनाए जाते हैं। साथ ही, पेयजल, विश्राम स्थल, प्राथमिक उपचार और परिसर में मवेशियों के प्रवेश पर नियंत्रण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
मामले में कंपनी का आधिकारिक और विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही सभी आरोपों और सवालों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
SDM ने जांच कर जानकारी देने का दिया आश्वासन
जमीरा माइंस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जब एसडीएम से जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने बताया कि वे उस समय बाहर हैं और वापस आने के बाद संबंधित तथ्यों की जानकारी लेकर अवगत कराएंगे।
प्रशासन की ओर से दिए गए इस आश्वासन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारियों द्वारा माइंस का निरीक्षण किया जाता है या नहीं। यदि निरीक्षण होता है, तो उसमें ब्लास्टिंग की प्रक्रिया, सुरक्षा शेल्टर, श्रमिकों की सुरक्षा, पेयजल की उपलब्धता और मवेशियों के प्रवेश से संबंधित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए।
साथ ही, यदि किसी प्रकार की कमी पाई जाती है, तो उसे दूर करने के लिए जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
बड़ा सवाल: क्या हादसे के बाद जागेगा प्रबंधन?
जमीरा माइंस में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों का जवाब अब तथ्यों और जांच के आधार पर मिलना जरूरी है। ब्लास्टिंग जैसी जोखिमपूर्ण गतिविधियों में सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता का आकलन केवल कागजी रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि मौके पर उपलब्ध व्यवस्थाओं और वास्तविक कार्यप्रणाली से किया जाना चाहिए।
यदि सुरक्षा शेल्टर की उपलब्धता, वैकल्पिक सुरक्षित स्थान, ब्लास्टिंग के दौरान क्षेत्र को खाली कराने की प्रक्रिया, पेयजल और परिसर की निगरानी में कोई कमी है, तो उसे समय रहते दूर किया जाना चाहिए। इसके लिए CMDC प्रबंधन के साथ-साथ संबंधित प्रशासनिक और खनन सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जमीरा माइंस में श्रमिकों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति क्या है? क्या संबंधित विभाग समय रहते जांच कर व्यवस्था दुरुस्त कराएंगे, या इन सवालों का जवाब किसी अप्रिय घटना के बाद ही मिलेगा?
फिलहाल, जमीरा माइंस में उठे इन सवालों पर CMDC प्रबंधन और संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा जांच के निष्कर्षों का इंतजार है।

