
✍🏻 संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर
नक्सलवाद के खात्मा के बाद भी 10-08 सालों से बस्तर रेंज मे पदस्थ पुलिस विभाग के 200-250 निरीक्षकों/उपनिरीक्षकों को अब तक नई पदस्थापना का इंतजार ही करना पड़ रहा है।
उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका लगाने के बाद भी पुलिस विभाग के आश्वासन पर आश्वासन से परेशान बस्तर मे तैनात पुलिस अधिकारीयों का परिवार अब एक बड़ा कदम उठाने को मजबूर है, पुलिस मुख्यालय की ऐसी क्या मज़बूरी है जो नक्सलवाद के पूर्ण रूप से खात्मा होने के बाद भी 10- 11 सालों से पदस्थ निरीक्षक और उप निरीक्षक स्तर के अधिकारीयों को बस्तर से निकालने मे इतना समय लगा रहे हैं।
उप निरीक्षक 2013 बैच के जवानो ने बस्तर मे हथियार बंद नक्सलियों से लड़ते हुए अपनी शहादत दी है जिसमें *मूलचंद कंवर, विनोद कौशिक, रूद्रप्रताप सिंह , श्याम किशोर शर्मा, दीपक भारद्वाज* शामिल हैं। 2013 बैच के उप निरिक्षकों को बिना कोई बांड के 1 तैनाती 3 वर्षों के लिए सन 2016 मे बस्तर रेंज भेजा गया था, परन्तु नक्सलवाद के खात्मा के बाद भी उनके परिवार को उनके वापस आने का इंतजार ही है।
संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवँ परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में बस्तर रेंज में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के स्थानांतरण हेतु लगाए गए याचिका में पुलिस विभाग ने बताया है कि निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का अनुसूचित क्षेत्र से 3 वर्षों में स्थानांतरण किया जाता है परंतु 8-10 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक बस्तर में पदस्थ 200-250 पुलिस अधिकारियों का स्थानांतरण नही किया गया है इस से छत्तीसगढ़ शासन एवं पुलिस मुख्यालय की स्थानंतरण नीति पर अब संदेह होने लगा है? उज्जवल दीवान ने
माननीय मुख्यमंत्री, गृह मंत्री एवं पुलिस महानिदेशक से विनम्र अपील की है कि लम्बे समय से बस्तर रेंज में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का जल्द से जल्द तबादला करें ताकि जून महीने मे वे अपने बच्चों का नवीन जिले के स्कूल मे एडमिशन करवा सकें और अपने परिवार के साथ रह सकें।
