बिलासपुर,,वादों की ‘राख’ में दबे ग्रामीण — मजदूर दिवस पर फूटेगा गुस्सा, एनटीपीसी के खिलाफ बड़ा आंदोलन।

Samwad Chhattisgarh

संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ न्यूज कुसमी बलरामपुर/9111740798

बिलासपुर,,वादों की ‘राख’ में दबे ग्रामीण — मजदूर दिवस पर फूटेगा गुस्सा, एनटीपीसी के खिलाफ बड़ा आंदोलन

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। विशेष रिपोर्ट

जिले से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित NTPC Limited के सीपत संयंत्र को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर पहुँच गया है। लंबे समय से वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार और शोषण के आरोप झेल रहे प्रबंधन के खिलाफ 1 मई, मजदूर दिवस के मौके पर बड़ा जनआंदोलन होने जा रहा है। प्रभावित गांवों के ग्रामीण सुखरीपाली स्थित ठाकुर देव द्वार पर 24 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे।

   वादों से ‘विरोध’ तक — क्यों भड़का जनाक्रोश?

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रबंधन ने बार-बार बैठकों और आश्वासनों के नाम पर केवल समय बिताया। 9 मार्च को प्रस्तावित आंदोलन को यह कहकर टाल दिया गया था कि 1 मई तक समाधान होगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में भारी नाराजगी है।

   भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, CBI जांच की मांग

स्थानीय जनप्रतिनिधियों—नरेन्द्र वस्त्रकार और रेवा शंकर साहू—ने फ्लाई ऐश विभाग के AGM पर सीधे भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि:
• फर्जी ट्रांसपोर्टरों को संरक्षण दिया जा रहा है
• एक ही वाहन पर कई नेम प्लेट लगाकर फर्जी बिलिंग हो रही है
• ‘सेनोस्फीयर’ जैसे प्रतिबंधित पदार्थ की अवैध निकासी हो रही है

उन्होंने AGM के बैंक अकाउंट और कॉल डिटेल की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) से कराने की मांग की है। दावा है कि जांच होने पर करोड़ों-अरबों के घोटाले सामने आएंगे।

        रोजगार में घोटाला और मजदूरों का शोषण

• आदिवासियों के लिए आरक्षित 152 पद अब तक लंबित
• 692 पदों की भर्ती में गड़बड़ी के आरोप
• स्थानीय युवाओं की जगह बाहरी लोगों को पैसे लेकर नौकरी
• मजदूरों को तय ₹541 की जगह सिर्फ ₹300–350 मजदूरी

यह सीधे तौर पर Minimum Wages Act, 1948 का उल्लंघन माना जा रहा है।

          किसानों की जमीन बर्बाद, पर्यावरण संकट

राख डाइक से रिसाव के कारण:
• खेत दलदल में तब्दील
• नहरें जाम
• पशुओं की मौत
• उड़ती राख से बीमारियां

यह मामला Environment Protection Act, 1986 और National Green Tribunal (NGT) के नियमों के उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है।

सड़कें खंडहर, CSR फंड पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है:
• 14 टन क्षमता वाली सड़कों पर 60–70 टन के ट्रक
• “घूमना पुल” 4 साल से जर्जर
• शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली में CSR फंड का उपयोग नहीं

यह Companies Act, 2013 के CSR प्रावधानों की अनदेखी मानी जा रही है।

              धमकी और दमन के आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि हक मांगने पर उन्हें National Security Act, 1980 (रासुका) लगाने की धमकी दी जाती है, जिसे उन्होंने अलोकतांत्रिक बताया।

                  AGM ने नहीं उठाया फोन

जब इस पूरे मामले पर AGM का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया, जिससे संदेह और गहरा गया है।

                     क्या कहते हैं जानकार?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ये आरोप केवल शिकायत नहीं, बल्कि श्रम कानून, पर्यावरण नियम और पेसा कानून के गंभीर उल्लंघन के संकेत हैं। यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो कई अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है।

अब क्या?

मजदूर दिवस पर होने वाला यह आंदोलन तय करेगा कि ग्रामीणों की आवाज सुनी जाएगी या नहीं। यदि प्रशासन और प्रबंधन ने समय रहते समाधान नहीं निकाला, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

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