चुनचुना,पुंदाग,,झारखंड जोड़ने वाली सड़क विभागीय कार्रवाई का इंतजार करते-करते ग्रामीणों ने खुद बनाया लकड़ी का पुल।

Samwad Chhattisgarh

✍🏻✍🏻संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर ✍🏻✍🏻

विभागीय कार्रवाई का इंतजार करते-करते ग्रामीणों ने खुद बनाया लकड़ी का पुल झारखंड पुलिस की भी रही योगदान।

पुंदाग-चुनचुना क्षेत्र के ग्रामीणों की पहल, करीब 10 हजार रुपये खर्च कर तैयार की अस्थायी पुलिया; कुसमी और बरगढ़ बाजार से जुड़ा है ग्रामीणों का जीवन।

बलरामपुर/कुसमी। बलरामपुर जिले के विकासखंड कुसमी की ग्राम पंचायत पुंदाग, चुनचुना और चरहू क्षेत्र में ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में आज भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कभी नक्सल प्रभावित और जिले के पिछड़े इलाकों में गिने जाने वाले इस क्षेत्र में बरगढ़ की ओर जाने वाला मार्ग बाधित होने के कारण ग्रामीणों के सामने आवागमन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई थी।

सड़क मार्ग बाधित होने के कारण भुताही, चुनचुना, चरहू और पुंदाग सहित आसपास के गांवों के लोगों को रोजमर्रा के आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय तक समस्या बनी रहने के बावजूद जब संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आखिरकार ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने स्वयं आगे आने का निर्णय लिया।

        ग्रामीणों ने मिलकर बनाया लकड़ी का पुल

आवागमन पूरी तरह बाधित न हो, इसके लिए ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से लकड़ी की अस्थायी पुलिया का निर्माण किया। ग्रामीणों के अनुसार इस पुलिया के निर्माण में करीब 10 हजार रुपये खर्च हुए हैं। ग्रामीणों ने स्वयं लकड़ी और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था कर पुलिया तैयार की, जिससे अब लोगों को आने-जाने में पहले की अपेक्षा काफी सुविधा मिल रही है।

ग्रामीणों की यह पहल प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है कि जहां मूलभूत आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है, वहां ग्रामीणों को अपनी जरूरत के लिए खुद संसाधन जुटाकर रास्ता बनाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

    कुसमी और बरगढ़ है ग्रामीणों का मुख्य बाजार

पुंदाग, चुनचुना, चरहू और भुताही क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए कुसमी और बरगढ़ मुख्य बाजार हैं। ग्रामीण इन्हीं बाजारों से अपने दैनिक जरूरत का सामान खरीदते हैं और अपनी आजीविका से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। सड़क मार्ग बाधित होने से ग्रामीणों को बाजार तक पहुंचने के लिए काफी कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कोई दूसरा वैकल्पिक सड जाती है। ऐसे में लकड़ी की पुलिया बनाकर ग्रामीणों ने फिलहाल आवागमन को सुगम करने का प्रयास किया है।

चुनचुना और पुंदाग के सरपंचों ने भी उठाई ग्रामीणों की समस्या

चरहू और पुंदाग ग्राम पंचायत के सरपंचों ने बताया कि क्षेत्र के लोगों के आने-जाने के लिए कोई दूसरा बेहतर सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से ग्रामीणों के साथ मिलकर इस रास्ते को आवागमन योग्य बनाने का बीड़ा उठाया गया।

सरपंचों का कहना है कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतें, बाजार तक पहुंच, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य जरूरी काम इसी मार्ग से जुड़े हुए हैं। रास्ता बाधित होने से ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए सभी ने मिलकर अस्थायी व्यवस्था के रूप में लकड़ी की पुलिया तैयार की है।

       अब प्रशासन से स्थायी समाधान की उम्मीद

ग्रामीणों ने अपने स्तर पर तत्काल समस्या का समाधान करने का प्रयास जरूर किया है, लेकिन लकड़ी की पुलिया स्थायी समाधान नहीं है। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर स्थायी एवं मजबूत पुलिया/पुल और सड़क मार्ग का निर्माण कराए, ताकि बरसात समेत पूरे साल क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

ग्रामीणों की इस पहल ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जिले के दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति कब सुधरेगी। फिलहाल ग्रामीणों द्वारा अपने खर्च और श्रम से तैयार की गई यह लकड़ी की पुलिया उनके संघर्ष और आपसी सहयोग की तस्वीर पेश कर रही है।

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