बलरामपुर,,कंठी घाट मार्ग पर 4 महीने बाद भी बसों का संचालन बहाल नहीं, 50 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करने को लोग हैं मजबूर।

Samwad Chhattisgarh

✍🏻✍🏻संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़ कुसमी बलरामपुर ✍🏻✍🏻

विगत कई वर्षों से चल रही कछुआ की चाल सड़क निर्माण कार्य।


लोकेशन: बलरामपुर | संवाद छत्तीसगढ़

बलरामपुर। बलरामपुर जिला मुख्यालय से चांदो, महाराजगंज, सामरी और कुसमी क्षेत्र को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण कंठी घाट मार्ग पर आवागमन की समस्या अब भी बनी हुई है। करीब 8 किलोमीटर लंबे इस घाट मार्ग पर सड़क मरम्मत का काम पिछले लगभग दो वर्षों से धीमी गति से चलने की बात सामने आ रही है। वहीं, बारिश के दौरान सुरक्षा कारणों से बंद किए गए यात्री बसों के संचालन को चार महीने बीत जाने के बाद भी बहाल नहीं किया जा सका है। इसके चलते क्षेत्र के लोगों को राजपुर और शंकरगढ़ होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस वैकल्पिक मार्ग से यात्रियों को लगभग 50 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है और सफर में दो से तीन घंटे तक अधिक समय लग रहा है।

बारिश थमने के बाद भी नहीं लौटी बसों की आवाजाही बस संचालकों का भी कहना है कि 04 महीने से बंद है कहां से पट पाएगा टेक्स इंश्योरेंस भी हो जाएगा फेल।

जानकारी के अनुसार, लगातार बारिश के कारण कंठी घाट मार्ग की सड़क की स्थिति खराब हो गई थी। सड़क पर दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने बलरामपुर कलेक्टर के निर्देश पर इस मार्ग से भारी वाहनों और यात्री बसों के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया था। बारिश के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से लिया गया यह निर्णय उचित हो सकता है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश का दौर समाप्त होने और मौसम साफ होने के बाद भी बसों का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।

लोगों के मुताबिक, सड़क मरम्मत का काम जारी है और मार्ग की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। कुछ हिस्सों में आवागमन के लिए रास्ता भी पहले से अधिक सुगम दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद बसों का परिचालन बहाल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि यदि सड़क की स्थिति में सुधार हुआ है, तो संबंधित विभाग और प्रशासन सुरक्षा मानकों के अनुरूप मार्ग का निरीक्षण कर बसों का संचालन शुरू कराने की दिशा में पहल क्यों नहीं कर रहे हैं?

     दो साल से धीमी गति से चल रहा निर्माण कार्य

कंठी घाट मार्ग की समस्या केवल बसों के संचालन तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर सड़क मरम्मत कार्य की धीमी गति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि लगभग दो वर्षों से चल रहे कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दे रही है। यदि समय रहते मरम्मत कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूरा कर लिया गया होता, तो संभवतः लोगों को इतने लंबे समय तक आवागमन की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

स्थानीय नागरिकों ने ठेकेदार की कार्यप्रणाली और संबंधित विभाग की निगरानी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा होनी चाहिए, ताकि सड़क मरम्मत निर्धारित समय-सीमा में पूरी हो और आम जनता को राहत मिल सके। हालांकि, निर्माण कार्य में देरी के वास्तविक कारणों और बस संचालन बहाल नहीं होने की स्थिति पर संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

   मरीजों और विद्यार्थियों पर पड़ रहा सीधा असर

कंठी घाट मार्ग बंद होने का सबसे अधिक असर कुसमी, चांदो, कोरंधा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों पर पड़ रहा है। इन इलाकों से जिला मुख्यालय बलरामपुर, रामानुजगंज और संभागीय मुख्यालय की ओर आने-जाने वाले लोगों को अब लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

अतिरिक्त दूरी के कारण यात्रियों का समय और किराया दोनों बढ़ रहे हैं। नौकरीपेशा लोगों को समय पर कार्यस्थल पहुंचने में परेशानी हो रही है, वहीं विद्यार्थियों को पढ़ाई, परीक्षा और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए लंबी यात्रा करनी पड़ रही है। रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति आर्थिक और मानसिक परेशानी का कारण बन रही है।

सबसे गंभीर चिंता मरीजों को लेकर जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में गंभीर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में देरी की आशंका बनी रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला मुख्यालय आने वाले परिवारों के लिए यह समस्या और भी कठिन हो जाती है।

   सुरक्षा जरूरी, लेकिन स्थायी समाधान भी जरूरी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बरसात के दौरान पहाड़ी घाट मार्ग पर सड़क खराब होने और दुर्घटनाओं की आशंका के मद्देनजर यातायात प्रतिबंधित करना सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक हो सकता है। लेकिन बारिश समाप्त होने के बाद सड़क की वास्तविक स्थिति का तकनीकी आकलन कर मरम्मत कार्य को तेजी से पूरा करना और सुरक्षित आवागमन बहाल करने की दिशा में समयबद्ध कार्रवाई करना भी उतना ही जरूरी है।

लोगों के अनुसार, यदि मार्ग पर कुछ स्थानों पर मरम्मत या सुरक्षा संबंधी कार्य शेष हैं, तो संबंधित विभाग को उनका स्पष्ट आकलन कर आवश्यक व्यवस्था करनी चाहिए। सड़क की स्थिति का निरीक्षण कर यह तय किया जाना चाहिए कि यात्री बसों और अन्य वाहनों का संचालन किन सुरक्षा शर्तों के तहत शुरू किया जा सकता है।

जिला प्रशासन से निरीक्षण और आवागमन बहाली की मांग

कंठी घाट मार्ग से प्रभावित लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द पहल करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांग है कि मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, शेष मरम्मत कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और सुरक्षा मानकों के अनुरूप यात्री बसों सहित अन्य वाहनों का आवागमन बहाल किया जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कंठी घाट मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि चांदो, कुसमी, सामरी, कोरंधा और आसपास के अनेक गांवों के लिए जिला मुख्यालय से जुड़ने का महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस मार्ग पर सामान्य आवागमन बहाल होने से यात्रियों को अतिरिक्त दूरी तय करने से राहत मिलेगी। साथ ही मरीजों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों का समय तथा खर्च भी बचेगा।

जब इस विषय पर पी डब्ल्यू डी के इंजिनियर से बात की तो उनका कहना है कि अभी संचालन के लिए मनाई है क्योंकि एक दो जगह बड़े पत्थर किनारे अटका हुआ है जिससे कभी भी नुकसान हो सकता है 03 दिवस के अंदर उस पत्थर को हटाया जाएगा तब बहाल किया जा सकता है।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कंठी घाट मार्ग पर सुरक्षित आवागमन बहाल करने के लिए कब तक ठोस कदम उठाते हैं। फिलहाल, स्थानीय लोग इस उम्मीद में हैं कि उनकी परेशानी को देखते हुए जल्द निरीक्षण, मरम्मत और बस संचालन शुरू करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

जनहित का सवाल: जब बारिश थम चुकी है और सड़क की स्थिति में सुधार होने की बात स्थानीय लोग कह रहे हैं, तो कंठी घाट मार्ग पर यात्री बसों का संचालन बहाल करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट होने तथा समयबद्ध समाधान की प्रतीक्षा है।

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