बलरामपुर,,कुसमी भूमि विवाद में न्याय न मिलने पर युवक ने दी आत्मदाह की चेतावनी, पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप।

Samwad Chhattisgarh

बलरामपुर,,कुसमी भूमि विवाद में न्याय न मिलने पर युवक ने दी आत्मदाह की चेतावनी, पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप लगाई न्याय की गुहार।

कुसमी नगर पंचायत कुसमी के रहने वाले अमजद उर्फ जाकिर हुसैन ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) बलरामपुर, एसडीएम (SDM) और थाना प्रभारी कुसमी को लिखित शिकायत सौंपी है। अमजद का आरोप है कि कोर्ट में चल रहे जमीन के मामले में पुलिस पक्षपात कर रही है और विपक्षी दल को जबरन कब्जा दिलाने की कोशिश कर रही है।


अमजद उर्फ जाकिर का कहना है कि , विपक्षी जरिफ अंसारी ने हमारी पैतृक जमीन और घर के पीछे की बाड़ी पर अवैध कब्जा करना चाहता है। अमजद का कहना है कि पहले उन्होंने सिर्फ 1 डिसमिल जमीन इस्तेमाल के लिए दी थी, लेकिन अब जरिफ अतिरिक्त जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। यह मामला अभी कोर्ट में लंबित है।

शिकायत में बताया गया है कि करीब दो महीने पहले भी विपक्षी पक्ष ने जबरन कब्जा करने की कोशिश की थी। उस दौरान मारपीट और गाली-गलौज भी हुई थी, जिसकी शिकायत कुसमी थाने में की गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

पुलिस की भूमिका पर उठा कई सवाल?

अमजद ने आरोप लगाया कि 21 मई 2026 की सुबह करीब 9 बजे, जरिफ अंसारी 20-25 लोगों के साथ उनके घर पहुंचा। वे लोग गाली-गलौज करते हुए डराने-धमकाने लगे। सूचना मिलने पर कुसमी थाने से एएसआई रमेश तिवारी, सिपाही चंदेल और अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। अमजद का कहना है कि पुलिस ने बिना किसी कोर्ट ऑर्डर के और बिना उनका पक्ष सुने, विपक्षी पक्ष का साथ दिया और उन्हें जमीन पर कब्जा दिलाने की कोशिश की। लेकिन जब संवाद छत्तीसगढ़ के संपादक के द्वारा थाना प्रभारी कुसमी विरासत कुजूर से फोन के माध्यम से बात की तो उनका कहना है कि 112 डायल में  लड़ाई झगड़ा का शिकायत प्राप्त हुई थी तो पुलिस वहां गई थी।

प्रशासन से मांग और चेतावनी?

अमजद ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने, पक्षपात करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने और आरोपी पक्ष पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कोर्ट का फैसला आने तक जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है।

पीड़ित अमजद ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर उन्हें न्याय नहीं मिला और कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो वह जिला कार्यालय के सामने आत्मदाह करने को मजबूर होंगे।
अब देखना यह होगा कि इस संवेदनशील और गंभीर मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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