
बेमौसम बारिश ने किसानों की बढ़ाई मुश्किलें, खेतों में बिछी धान की पकी फसल; काटकर रखी फसल पानी में डूबी

तीन दिनों से लगातार बारिश और तेज हवाओं ने बिगाड़ा खेती का गणित, मेहनत और लागत पर फिरता नजर आ रहा पानी; फसल खराब होने की आशंका से चिंतित किसान

कुसमी / बलरामपुर।✍️ संपादक जसीम खान संवाद छत्तीसगढ़✍️
चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश ने विकासखंड कुसमी क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन मौसम के अचानक बदले मिजाज ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश और तेज हवाओं के चलते खेतों में खड़ी पकी धान की फसल जमीन पर गिरने लगी है, वहीं जिन किसानों ने फसल की कटाई कर खेतों में या खुले स्थानों पर धान रखा था, उनकी फसल बारिश के पानी में डूब गई है। इससे धान के खराब होने और उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों के लिए यह समय सालभर की मेहनत का फल घर लाने का होता है, लेकिन लगातार बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरना शुरू कर दिया है। खेतों में तैयार खड़ी फसल को देखकर किसान मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं कटाई कर चुके किसान पानी में भीगी धान की फसल को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।
खेतों में गिरने लगी पककर तैयार धान की फसल
लगातार बारिश के साथ चल रही तेज हवाओं का असर खेतों में पककर तैयार धान की फसल पर साफ दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर धान की बालियों का वजन और तेज हवा के कारण फसल जमीन पर गिर गई है। खेतों में पानी भरने से गिरी हुई फसल को संभालना भी किसानों के लिए मुश्किल हो रहा है।
किसानों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि खेतों में गिरी धान की फसल लंबे समय तक पानी और नमी के संपर्क में रही तो बालियों में अंकुरण, दानों के काले पड़ने और गुणवत्ता खराब होने की आशंका बढ़ सकती है। इससे उपज की कीमत पर भी असर पड़ सकता है।
कटाई के बाद रखी धान की फसल पानी में डूबी
बारिश ने उन किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है, जिन्होंने धान की कटाई कर फसल खेतों में या खुले स्थानों पर रखी थी। लगातार बारिश के कारण कटी हुई धान की फसल पानी में भीग गई है। खेतों में पानी भरने से फसल को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना भी चुनौती बन गया है।
किसानों का कहना है कि धान की कटाई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों में पहले ही काफी खर्च हो चुका है। ऐसे समय में यदि तैयार फसल खराब होती है तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ने से आगामी कृषि कार्य भी प्रभावित होने की आशंका है।
सालभर की मेहनत पर संकट, आर्थिक नुकसान की सता रही चिंता
किसानों के अनुसार धान की फसल तैयार करने में बीज, खाद, दवाई, मजदूरी और खेती से जुड़े अन्य कार्यों पर काफी लागत आती है। इसके अलावा पूरे साल खेतों में मेहनत करने के बाद किसान कटाई के समय अच्छी उपज की उम्मीद करते हैं। लेकिन लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश ने उनकी तैयारियों को प्रभावित कर दिया है।
किसानों को आशंका है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो खेतों में खड़ी और काटकर रखी गई धान की फसल दोनों को नुकसान हो सकता है। इससे न केवल धान की गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि किसानों की आमदनी पर भी असर पड़ सकता है।
प्रभावित फसलों का सर्वे कराकर राहत देने की मांग
लगातार बारिश से प्रभावित किसानों ने प्रशासन से खेतों में पानी भरने और धान की फसल को हुए नुकसान का जायजा लेने की मांग की है। किसानों का कहना है कि संबंधित विभाग के अधिकारियों को प्रभावित गांवों और खेतों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन करना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
वहीं किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन की ओर से फसल नुकसान का सर्वे कराकर नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की पहल की जाएगी। फिलहाल किसान मौसम खुलने और अपनी बची हुई फसल को सुरक्षित बचाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

